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PM मोदी की टेलीफोन कूटनीति में प्रवा​सी भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम

  • कोरोना की स्थिति पर पीएम मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से की चर्चा
  • कई देशों के नेताओं से पीएम मोदी ने की बात, भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा रहा अहम मुद्दा

पिछले कुछ हफ्तों में पीएम नरेंद्र मोदी कई खाड़ी देशों के नेताओं के साथ सलाह-मशविरा कर रहे हैं. खाड़ी के नेताओं के साथ मोदी की टेलीफोन कूटनीति में भारतीय प्रवासियों की चिंता सबसे अहम मुद्दों में से एक है.

उन्होंने COVID-19 स्थिति पर चर्चा करने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को 17 मार्च की सुबह फोन किया था. उसके बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से बात की है.

26 मार्च को उन्होंने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की. 26 मार्च को ही उन्होंने कतर के अमीर ऑफ स्टेट शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की.

एक अप्रैल को कुवैत के प्रधानमंत्री शेख सबा अल-खालिद अल-हमद अल-सबाह से बात की. 6 अप्रैल को बहरीन के राजा महामहिम हमद बिन ईसा अल खलीफा से बात की. इन चर्चाओं के दौरान पीएम मोदी द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में से एक मुद्दा इन राष्ट्रों में रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा का रहा.

पीएम ने व्यक्तिगत रूप से इन नेताओं से भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया और इनमें से प्रत्येक नेता ने पीएम मोदी को पुख्ता आश्वासन दिया है कि इस कठिन समय में भारतीय प्रवासियों की अच्छी तरह से देखभाल की जाएगी.

लॉकडाउन के मौजूदा परिदृश्य में हर कहीं यात्राओं पर प्रतिबंध है और बढ़ते COVID-19 के खतरे के मद्देनजर स्वाभाविक रूप से विदेशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के परिवारों में दहशत का माहौल है. ऐसे समय में पीएम मोदी ने लोगों की चिंताओं को कम करने के लिए व्यक्तिगत रूप से खुद इसकी जिम्मेदारी ले ली है.

भारतीय मिशन के प्रमुखों से बातचीत के क्रम में पीएम ने ईरान और यूएई में भारतीय राजदूतों से बातचीत की और उन्होंने इसी बात पर जोर दिया कि खाड़ी में प्रवासी भारतीयों का अच्छी तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए.

खाड़ी के नेताओं के साथ पीएम मोदी की व्यक्तिगत रूप से अच्छी केमिस्ट्री है जो पिछले कई सालों से चल रही है. खाड़ी देशों ने पीएम मोदी को अपने राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित भी किया है.

प्रधानमंत्री ने इनमें से कई देशों का दौरा किया है और संबंधित शासकों की अनुमति से भारतीय कामगारों के शिविरों में भी गए हैं. उन्होंने बहरीन और यूएई जैसे देशों में बड़े पैमाने पर सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं.

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