क्या चल रहा है?

#OperationShambulance: सायरन लगी एंबुलेंस से लॉकडाउन की उड़ा रहे धज्जियां

  • एम्बुलेंस को टैक्सी बना उड़ाई जा रही लॉकडाउन की धज्जियां
  • प्राइवेट टैक्सियों की तरह इस्तेमाल कर शातिर भर रहे अपनी जेबें

एम्बुलेंस जीवन रक्षक हो सकती है, खास तौर पर महामारी फैली होने के वक्त…लेकिन इंडिया टुडे स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (SIT) की जांच से खुलासा हुआ है कि इमरजेंसी के वक्त काम आने वाले इन वाहनों का देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट टैक्सियों की तरह इस्तेमाल कर कुछ शातिर कैसे अपनी जेबें भर रहे हैं.

जांच में सामने आया कि देश के कुछ टॉप अस्पतालों से जुड़े हुए एम्बुलेंस ऑपरेटर्स मोटी कीमत वसूल कर स्वस्थ यात्रियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचा रहे हैं.

बीना शर्मा दिल्ली में एम्बुलेंस सर्विस प्रोवाइडर है. बीना शर्मा ने पांच लोगों को अलीगढ़ तक पहुंचाने के लिए 3,500 रुपये की मांग की. नॉन-प्रॉफिट ‘मानव जनहित कल्याण संस्थान’ से जुड़ी बीना शर्मा ने इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स को बताया कि जो यात्रा करना चाहते हैं उन्हें एम्बुलेंस में लाश के साथ जाने का सुझाव दिया है.

शर्मा ने कहा, ‘आपको लाश के साथ जाना होगा. उसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं. वो तुमसे चिपटेगी नहीं. हम हर वक्त ऐसा करते हैं. उन्हीं के साथ खाते-सोते हैं.’

बीमारी का बहाना

शर्मा ने अंडरकवर रिपोर्टर्स को बीमारी का बहाना गढ़ने के लिए भी कहा. साथ ही हॉस्पिटल कार्ड साथ रखने के लिए कहा जिसे चेक प्वॉइंट्स पर पुलिस को दिखाया जा सके. शर्मा ने कहा, ‘हम रात को नहीं निकल सकते. हम शाहदरा रूट से भी नहीं जाएंगे. हम बारापुला से डीएनडी फ्लाईवे पकड़ कर जाएंगे.’

अंडर कवर रिपोर्टर ने पूछा- ‘हमें अस्पताल में क्या करना होगा?’

शर्मा- ‘अंदर जाओ (सफदरजंग) अस्पताल में और झूठी बीमारी बताकर कार्ड बनवा लाओ. फिर इमरजेंसी में जाओ. वो भी कार्ड बनाएंगे. इस कार्ड को रात में ले आना. हम दो-ढाई बजे रवाना होंगे.’

अनीता अपने पति के साथ छह एम्बुलेंस का बेड़ा चलाती है. अनीता ने आगरा तक पांच लोगों को पहुंचाने के लिए 8,000 रुपये की मांग की. इसके लिए अनीता ने कहा कि एक यात्री को स्ट्रेचर पर मरीज होने का नाटक करते हुए जाना पड़ेगा.

दिल्ली में ‘सुंदर एम्बुलेंस सर्विस’ चलाने वाली अनीता ने कहा, ‘मेरी एम्बुलेंस आसानी से पांच लोगों को ले जाएगी. अगर आप मेरी सलाह मानो तो रास्ते में दिक्कत नहीं आएगी. अगर आपमें से कोई मरीज बनकर स्ट्रेचर पर नहीं लेटेगा, तो पुलिस वाले आपको उतार देंगे. हमारा वाहन जब्त हो जाएगा और ड्राइवर की पिटाई होगी अलग.’

अंडर कवर रिपोर्टर- ‘ये चार्ज आगरा एक तरफ जाने का होगा या आनेजाने का.’

अनीता- ‘हम राउंड ट्रिप का चार्ज करते हैं.’

रास्ते में रिश्वत

दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल के बाहर अरुण ने न सिर्फ मुरादाबाद तक यात्रियों को ले जाने की पेशकश की, बल्कि सारे कागजात भी खुद बनवाने का दावा किया. अरुण ने खुद ही कबूला कि लॉकडाउन के बावजूद रास्ते में रिश्वत देता हुआ वो यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा देगा. अरुण ने कहा, ‘हम उन्हें ले जाएंगे लेकिन उनमें से एक को लेटकर (मरीज की तरह) जाना होगा.’

रिपोर्टर- ‘अगर रास्ते में कागज चेक हुए तो?’

अरुण- ‘हम उन्हें तैयार कराएंगे. कागज सफदरजंग से बनवाएंगे.’

अरुण ने कुछ कागज दिखाए जो उसके मुताबिक फर्जी थे और दिल्ली के कोटला में स्थित अस्पताल से बनवाए गए थे. अरुण ने कहा, ‘ये कागज फर्जी हैं. हम यात्रियों को ले जाने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं.’

रिपोर्टर- ‘कितना चार्ज करोगे?’

अरुण- ‘5,000 रुपये (तीन यात्रियों के लिए) लगेंगे, लेकिन ये भी ध्यान में रखिए कि चेकिंग कहीं होती है तो मुझे 100, 200, 500 या 1,000 (रुपये ) घूस में देने होंगे.’

एक और एम्बुलेंस ऑपरेटर रामचंद्र ने तीन यात्रियों को इमरजेंसी वाहन में मेरठ ले जाने के लिए 4,000 रुपये की मांग की. रामचंद्र ने भी रास्ते में पुलिस को अपने हिसाब से मैनेज करने का दावा किया.

रामचंद्र- ‘भाई आपको वहां छोड़ देंगे. 4000 रुपये लगेंगे. मैं मैनेज (चेकिंग को) कर लूंगा.’

रिपोर्टर- ‘पुलिस से क्या कहोगे?’

रामचंद्र- ‘मैं उनसे कहूंगा किसी की मौत हो गई है. मैं कोई बहाने से काम निकाल लूंगा. मैं सब कुछ कर लूंगा.’

Source :aajtak.intoday.in

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