क्या चल रहा है?

GST मुआवजे के लिए बढ़ा राज्यों का दबाव, केंद्र ने दिए 14,103 करोड़ रुपये

  • सरकार ने पहली किस्त में 19,950 करोड़ रुपये जारी किए थे
  • दूसरी किस्त के साथ अक्टूबर-नवंबर के बकाये का भुगतान

बीते दिनों पंंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार को एक लेटर लिखा था. इस लेटर में अमरिंदर सिंह ने सरकार से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे की बकाया रकम देने को कहा था.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अब केंद्र सरकार ने बकाये की एक किस्त (14,103 करोड़ रुपये) का भुगतान किया है. केंद्र ने ये रकम ऐसे समय में जारी की है जब राज्य सरकारें कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए ‘लॉकडाउन’ के कारण नकदी की समस्या से जूझ रही हैं.

34,000 करोड़ रुपये का भुगतान

एजेंसी सूत्रों ने बताया कि इस ताजा भुगतान के साथ वित्त मंत्रालय ने अक्टूबर और नवंबर के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में कुल 34,000 करोड़ रुपये लंबित बकाया का भुगतान कर दिया है. सूत्रों के अनुसार पहली किस्त में 19,950 करोड़ रुपये 17 फरवरी को जबकि शेष राशि 14,103 करोड़ रुपये राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को मंगलवार को जारी की गई.

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समाचार एजेंसी के सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय दिसंबर और जनवरी के लंबित बकाये के भुगतान पर भी गौर कर रहा है और इसे चरणबद्ध तरीके से जल्द जारी किया जा सकता है. केंद्र ने एक जुलाई 2017 को जीएसटी के अमल में आने के बाद से राज्यों को क्षतिपूर्ति के रूप में 2.45 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है.

क्यों केंद्र कर रहा भुगतान?

बता दें कि जीएसटी कानून में राज्यों को जीएसटी क्रियान्वयन के पहले पांच साल में राजस्व में किसी भी प्रकार के नुकसान की भरपाई की गारंटी दी गयी है. जीएसटी कानून एक जुलाई 2017 को अमल में आया. कमी का आकलन आधार वर्ष 2015-16 से जीएसटी संग्रह में 14 प्रतिशत सालाना वृद्धि को मानकर किया जाता है. जीएसटी के तहत वस्तुओं पर टैक्स 5,12,18 और 28 प्रतिशत के स्लैब में लगाया जाता है.

मार्च में जीएसटी कलेक्शन गिरा

बता दें कि जीएसटी संग्रह मार्च में एक लाख करोड़ रुपये के मनौवज्ञानिक स्तर से नीचे 97,597 करोड़ रुपये रहा. चार महीने में पहली बार था जब जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से नीचे रहा. इसका कारण कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये जारी देशव्यापी बंद है. इस साल मार्च में जीएसटी संग्रह पिछले साल के इसी महीने में वसूले गये 1.06 लाख करोड़ रुपये के मुकबले 8.4 प्रतिशत कम है.

Source :aajtak.intoday.in

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