क्या चल रहा है?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना का इलाज संभव नहीं, अभी केवल ट्रायल के तौर पर इसका प्रयोग किया जाए

  • केंद्र सरकार ने अहमदाबाद और सूरत में संक्रमण की स्थिति का जायजा लिया, दोनों जगहों पर संतोषजनक प्रोग्रेस मिली
  • स्वास्थ मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा- संक्रमण फैलने की रफ्तार कम हुई, 17 जिलों में पिछले 28 दिनों से कोई केस नहीं

नई दिल्ली. स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि देश में कोरोना संक्रमितों की रिकवरी रेट अब 23.3% हो गई है। इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह देश के लिए अच्छी बात है। अभी तक देश में संक्रमण के कुल 29435 मामले आ चुके हैं। इनमें 21632 एक्टिव केस हैं जबकि शेष का इलाज चल रहा है। पिछले एक दिन में 684 लोगों को सही किया जा चुका है। संक्रमण फैलने की रफ्तार भी कम हुई है। 17 जिलों में पिछले 28 दिनों से कोई केस नहीं आया है। अग्रवाल ने इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईसीएमआर) का हवाला देते हुए कहा कि कोरोना का प्लाज्मा थैरेपी के जरिए इलाज नहीं कहा जा सकता है। अभी इसका कोई साक्ष्य नहीं है कि इसके जरिए मरीजों को ठीक किया जा सकता है। आईसीएमआर ने इस पर अध्ययन शुरू कर दिया है। तब तक इसको लेकर किसी प्रकार का दावा नहीं किया जाना चाहिए। अगर सही तरीके से इसका ख्याल नहीं रखा गया तो इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसलिए अभी केवल ट्रायल और रिसर्च के तौर पर इस पर फोकस करना चाहिए।

अहमदाबाद और सूरत में आईएमसीटी की टीम का निरीक्षण
गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पीएस श्रीवास्तव ने बताया कि आईएमसीटी की टीम ने सूरत और अहमदाबाद में निरीक्षण किया। सूरत में पाया कि प्रशासन तकनीक की मदद से संक्रमितों और संदिग्धों की पहचान कर रही है। सूरत नगर निगम का वॉर रूम और डॉक्टर्स की टीम पूरे शहर में निगरानी रख रही है। लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस ड्रोन की मदद ले रही है। अंदरूनी गलियों में लॉकडाउन का पालन नहीं हो रहा है। इसके लिए कई सुझाव दिए गए हैं। अहमदाबाद में भी इसी तरह कई हॉस्पिटल्स का निरीक्षण किया। आईएमसीटी ने संक्रमण की रोकथाम के लिए कई सुझाव जिला प्रशासन को दिया है। इसके अलावा केंद्र सरकार की मदद से एक रिसर्च सेंटर स्थापित करने को भी कहा। जहां संक्रमण पर शोध हो सके।

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