क्या चल रहा है?

सेंसिटिव माना जाने वाला डिफेंस सेक्टर विदेशी कंपनियों के हवाले, एफडीआई बढ़कर 74% हुआ

  • हथियारों और प्लेटफॉर्म्स की लिस्ट को नोटिफाई किया जाएगा और उनके इम्पोर्ट पर बैन लगाया जाएगा
  • पार्दर्शिता लाने और बेहतर प्रदर्शन के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के संकट से उबरने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ पैकेज का वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज चौथा बेकअप बताया। इसमें देश को डिफेंस प्रोडक्शन में आत्मनिर्भरता बनाने पर भी जोर दिया गया। वहीं, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में स्वचालित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की लिमिट को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने की भी घोषणा की गई।

क्या घोषणा हुई?

वित्त मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पाद में आत्म निर्भरता लाने के लिए मेक इन इंडिया को बल देना बहुत आवश्यक है। पिछले 3 वर्षों में बहुत सारे क्षेत्रों में भारत में इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। हथियारों और प्लेटफॉर्म्स की लिस्ट को नोटिफाई किया जाएगा और उनके इम्पोर्ट पर बैन लगाया जाएगा।

किसे फायदा होगा?
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा। ऐसे में इम्पोर्ट से जुड़ी भारत की बड़ी निजी कंपनियां जैसे रिलायंस, टाटा या अन्य को इसका फायदा मिल सकता है। अच्छे हथियार मिलने से सेना को फायदा मिलेगा। वहीं, दुनियाभर के देशों पर हमारी निर्भरता कम होने से देश को फायदा होगा।

क्या फायदा होगा?
डिफेंस इम्पोर्ट बिल में भारी कटौती होगी और जिसका सीधा लाभ उन भारतीय कंपनियों को मिलेगा जो हिंदुस्तान के सैन्य की आपूर्ति करेंगी। हिंदुस्तान के अंदर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हथियार और उनके पुर्जे भी हमें इम्पोर्ट करने पड़ते हैं, उसमें भी कमी लाने के लिए यहीं पर मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी। ऐसे में इनसे जुड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचेगा।

फायदा कब मिलेगा?
सरकार ने अभी इस बारे में कुछ साफ नहीं किया है। इससे जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की लिमिट बढ़ाई
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में स्वचालित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की लिमिट को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने की बात भी कही गई। यानी FDI का जो रूट है उसकी लिमिट को बढ़ा दिया जाएगा। और टाइम बॉन्ड डिफरेंस प्रफोर्मेंस प्रोसेस हमारा हो उसके लिए त्वरित फैसले लेने का भी काम किया जाएगा। अनुबंध प्रबंधन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया जाएगा।

क्या है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)?

किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश में किया गया निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कहलाता है। ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उस कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है, जिसमें उसका पैसा लगता है। किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए कम-से-कम कंपनी में विदेशी निवेशक को 10 फीसदी शेयर खरीदने पड़ते हैं। साथ ही उसे निवेश वाली कंपनी में मताधिकार भी हासिल करना पड़ता है।

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