क्या चल रहा है?

लॉकडाउन में आबोहवा सुधरी तो जिंदगी में भी आया बदलाव, प्रदूषण से मुक्ति हुआ शहर

  • सदर अस्पताल में न मरीजों की चीख-पुकार थी और न ही परिजनों की भीड़, वायु प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण पूरी तरह हुआ है कम

सीवान. (विवेक कुमार सिंह) कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 22 मार्च को जनता कफ्र्यू के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 मार्च को समूचे देश में लॉकडाउन का निर्णय किया। मध्य रात्रि को 12 बजे से लॉकडाउन की घोषणा ने एक झटके में ही शहर से गांव तक का नजारा ही बदल दिया। शहर-बाजार विरान हो गए, सड़कों पर सन्नाटा पसर गया और जिंदगी पूरी तरह थम सी गयी। लॉकडाउन से पहले का  शहर के माहौल व अब 26 अप्रैल को शहर का नजारा देखने के बाद यह साफ हो गया कि कोरोना ने किस प्रकार आम से खास लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह उलट-पलट कर रख दिया है। स्कूलों में बच्चों का कलरव थम चुका है तो कॉलेजों के कैम्पस विरान पड़े हैं। रोडवेज बस स्टैंड पर अब बसों की हार्न सुनायी नहीं पड़ रही तो ट्रेनों की आवाजाजी से हमेशा व्यस्त रहने वाला रेलवे स्टेशन सांय-सांय कर रहा है। जो टेंपू और ई-रिक्शा शहरों में जाम की स्थिति उत्पन्न कर देते थे, वे जहां-तहां खड़े सूनसान सड़क से सवाल पूछते दिख रहे हैं।
100 से 25 करोड़ पर सिमटा बैंक कारोबार
लॉकडाउन ने बैंक के कारोबार को भी पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। अग्रणी बैंक के प्रबंधक नरेंद्र कुमार के अनुसार लॉकडाउन से पहले सामान्य दिनों में जिले भर में बैंकों का कारोबार 100 करोड़ रुपये तक का होता था। इस समय यह घटकर 20 से 25 करोड़ तक रह गया है। बताया कि चूंकि बाजार, प्रतिष्ठान, औद्योगिक संस्थान आदि बंद हैं, लिहाजा बैंकों में जमा-निकासी काफी कम हो गयी है।
गुलजार रहने वाले बाजार में पुलिस का पहरा
हमेशा गुलजार रहने वाले बाजारों में इस समय सिर्फ और सिर्फ पुलिस का ही पहरा है। 23 मार्च को लॉकडाउन से पहले जिस बाजार में सामानों की खरीदारी के लिए दुकानों पर लोगों की भीड़ थी, वहीं वे दुकानें अब शटर खुलने की प्रतीक्षा में हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में रोजाना एक अरब रुपये का कारोबार होता है।

कम हो गई हैं पेट्रोल व डीजल की बिक्री
पूरे जिले में पेट्रोलियम विभाग के तीनों कंपनियों का करीब 94 पंप कार्यरत है। इन सभी पेट्रोलपंपों पर लॉकडाउन के दौरान 60 से 70 प्रतिशत पेट्रोल और डीजल के बिक्री में कमी आई है। इंडियन ऑयल के अधिकारी सत्येंद्र राम ने बताया कि पूरे जिले में करीब 40 पेट्रोल पंप है। पहले डीजल 120 केएल प्रतिदिन आता था और आज 60 केएल करीब आ रहा है। इसी तरह पेट्रोल पहले 80 केएल आता था आज वह प्रतिदिन 30 केएल के करीब आ रहा है। एचपी के अधिकारी मोहन महतो ने बताया कि पहले 1200 केएल प्रतिमाह पेट्रोल आ रहा था जो अब 450 केएल पर सीमट गया है। इतह डीजल 1500 केएल आता था जो 700 के करीब आ रहा है। भारत पेट्रोलियम के अधिकारी अशुतोष ने बताया कि पहले 120 केएल डीजल आता था जो अब 60 केएल आ रहा है।

अस्पताल में 7 सौ की जगह 200 आ रहे हैं मरीज
लॉकडाउन के पूर्व जिस सदर अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी में मरीजों व उनके परिजनों की भीड़ होती थी, वही लॉकडाउन में 26 अप्रैल का नजारा बदला-बदला सा था।  इमरजेंसी के गेट पर सिर्फ एक एम्बुलेंस खड़ी थी। न मरीजों की चीख-पुकार थी और न ही परिजनों की भीड़। साइकिल-वाहन की संख्या भी पहले जैसा नहीं दिख रहा था। सदर अस्पताल  के अस्पताल प्रबंधक एसरारूल हक के अनुसार सामान्य दिनों में ओपीडी में 700-800 तक मरीज प्रतिदिन आते थे। लॉकडाउन में यह संख्या घटकर 175 से 200 रह गयी है। डॉ.मुकेश कुमार बताते है कि पहले लोग बाहर का खाना यानी फास्ट फूड खाकर बीमार पड़ते थे लेकिन लॉकडाउन का असर है कि बंद होने से लोग कम बीमार पड़ रहे है। लोगों के द्वारा अपने घर का खाना खाने से प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ गया है।

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