क्या चल रहा है?

लॉकडाउन तोड़ा तो दर्ज होगा केस, जिले की सीमा सील

  • सभी स्थानों पर बैरियर लगाया गया, पुलिस और मजिस्ट्रेट की तीन शिफ्टों में तैनाती, गैरजरूरी बाहर निकलनेवालों की जब्त होगी गाड़ी
  • किसी भी सूरत में मेडिकल को छोड़ अन्य दुकान शाम छह बजे से बाद नहीं खुलेंगी, छह बजे के बाद इमर्जेंसी सेवा की गाड़ियां ही निकलेंगीं

सासाराम. कोरोना संक्रमण के बढ़ते संभावित खतरे को देखते हुए जिले की सीमा को सभी दिशाओं से सील कर दिया गया है। बता दें कि भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद और कैमूर जिले से रोहतास की सीमा सीधे लगती है। राज्य के कई जिलों में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों के बाद रोहतास जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कोरोना वायरस का संक्रमण जिले में न हो इसके लिए एहतियातन कैमूर से सटे खुरमाबाद में, बक्सर से सटे कोचस प्रखंड के बसहीं नदी पुल, भोजपुर से सटे बिक्रमगंज की सीमा, अरवल से सटे नासरीगंज सोनपुल, औरंगाबाद जिले से सटे डेहरी जवाहर सेतु पुल सहित जिले की सीमा सड़क को सील कर दिया गया है। इन सभी स्थानों पर बैरियर भी लगा दिया गया है जहां पुलिस और मजिस्ट्रेट की तीन शिफ्ट में स्थाई तैनाती की गयी है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए एसपी सत्यवीर सिंह ने बताया है कि गैरजरूरी बाहर निकलनेवालों पर अब केस दर्ज किया जाएगा। उनकी गाड़ियां भी जब्त कर ली जाएंगी। किसी भी सूरत में मेडिकल को छोड़कर कोई भी दुकान संध्या छह बजे से बाद खुली नहीं दिखनी चाहिए। छह बजे के बाद इमर्जेंसी सेवा छोड़कर किसी भी गाड़ी को नहीं निकलने दिया जाएगा। इमर्जेंसी सेवा वाले वाहन, जैसे- दवा, खाद्यान्न, दूध, मेडिकल जैसी गाड़ियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। इस दौरान गाड़ियों की स्कैनिंग की जाएगी और उनमें सवार लोगों को भी सेनेटाइज किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इन स्थानों पर कानून भंग करनेवालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

निजी प्रचार के लिए सामग्री वितरण पर होगी कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह ने रविवार को कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग को भंग करने वालों के खिलाफ थानाध्यक्ष कार्रवाई करें। कोरोना वायरस के खतरे के बीच राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा राहत सामग्री के नाम पर वायरस से बचाव की सामग्री और भोजन पैकेट वितरण करने के लिए भीड़ इकट्ठा करने की कार्रवाई को उन्होंने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा है कि जिन्हें भी सामग्री और भोजन पैकेट का वितरण करना है वह स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें और उन्हें वस्तु मुहैया कराएं ताकि वास्तविक लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा सके।

Source :www.bhaskar.com

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