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लॉकडाउन: ट्रेड यूनियंस ने वेतन में देरी और छंटनी का मुद्दा उठाया, मोदी सरकार को लिखी चिट्ठी

  • RSS से जुड़े BMS और लेफ्ट समर्थित CITU ने मोदी सरकार को लिखी चिट्ठी
  • लॉकडाउन से विभिन्न सेक्टरों में श्रमिकों को हो रही परेशानियों का किया जिक्र

ट्रेड यूनियंस ने नरेंद्र मोदी सरकार को चिट्ठी लिखकर वेतन मिलने में देरी और छंटनी का मुद्दा उठाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) और लेफ्ट समर्थित CITU ने अलग-अलग लिखी चिट्ठियों में देश भर में लॉकडाउन से विभिन्न सेक्टरों में श्रमिकों को पेश आ रही परेशानियों का जिक्र किया है. कोरोना वायरस महामारी के खतरे को देखते हुए मोदी सरकार ने 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर रखा है.

केंद्र सरकार ने 20 मार्च को पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर, दोनों के सभी नियोक्ताओं को निर्देश/सलाह जारी की थी कि वो छंटनी ना करें और ठेके/दिहाड़ी मजदूरों समेत सभी कर्मचारियों को लॉकडाउन की अवधि के वेतन/भत्तों का भुगतान करें. ट्रेड यूनियंस ने अपनी चिट्ठियों में सरकार के उन निर्देशों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन होने का जिक्र किया है.

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BMS ने प्रधानमंत्री को भेजी अपनी चिट्ठी में लिखा है, ”छोटे कारोबार और MSMEs बड़ी दिक्कत में फंस गए हैं. अधिकतर के पास अपने कर्मचारियों को पैसे देने और कारोबार का वजूद बनाए रखने के लिए फंड नहीं है. सरकार को ऐसे चैनल विकसित करने चाहिए जो इन कर्मचारियों का ध्यान रख सके. साथ ही उन MSMEs और अन्य छोटे कारोबारों के लिए लॉकडाउन के बाद राहत पैकेज का एलान किया जाए जो संगठित क्षेत्र से नहीं जुड़े हैं.”

BMS की चिट्ठी में आरोप लगाया गया है, “कुछ राज्यों ने राहत पैकेज का ऐलान किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों ने अब तक कोई रकम ट्रांसफर नहीं की है. तमिलनाडु में हालत सबसे खराब है. वहां दस फीसदी आबादी भुखमरी की तरफ धकेल दी गई है. मजदूरो को सूदखोरों के भरोसे रहना पड़ रहा है जो उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदतर बना देंगे. ये इमरजेंसी जैसी स्थिति है सरकार को तुरंत दखल देना चाहिए.”

BMS ने सुझाव दिया है कि महामारी का खतरा खत्म हो जाने के बाद लॉकडाउन को चरणबद्ध ढंग से हटाना चाहिए जिससे उद्योग और मजदूरों को लौटने के लिए पर्याप्त समय और भरोसा मिल सके. साथ ही इस ट्रेड यूनियन ने मांग की है कि औद्योगिक जगत को दोबारा पटरी पर लाने और उसके नए सिरे से विकास के लिए त्रिपक्षीय कमेटी का गठन किया जाए.

लेफ्ट समर्थित ट्रेड यूनियन CITU ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को चिट्ठी भेजी है. इसमें सरकारी निर्देश के उल्लंघन के कई मामलों का हवाला दिया गया है. इनमें पश्चिम बंगाल में बैंक के ठेका/दिहाड़ी कर्मचारियों की सेवाएं खत्म करना शामिल है. ऐसी ही स्थिति जम्मू और कश्मीर में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन और हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट के साथ है. चिट्ठी में पश्चिम बंगाल में जूट मिलों और चाय बागानों के मजदूरों को पारिश्रमिक नहीं दिए जाने का भी जिक्र है.

 

 

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