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मैथेमैटिकल ओलिंपियाड ने दिए कई गणितज्ञ, भारत में छात्रों को अभी भी सही मार्गदर्शन की जरूरत

  • कोरोना संकट के बीच विपरीत परिस्थितियों में सफलता के सूत्रसुपर-30 के आनंद कुमार के शब्दों में

50 के दशक में विकसित देशों में मैथेमैटिकल ओलिंपियाड की परम्परा शुरू हो चुकी थी। इसके तहत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को चयनित करके उन्हें विज्ञान तथा गणित विषयों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाने लगा। कई नामचीन गणितज्ञ और वैज्ञानिक हुए जो मैथेमैटिकल ओलिंपियाड की ही उपज थे। विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाने के उद्देश्य से 1956 में कुछ पूर्वी यूरोप के देशों ने ‘इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड’ के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी। 1959 में पहली बार ‘इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड’ का आयोजन रोमानिया में किया गया। जिसमें सिर्फ सात देशों रोमानिया, बुल्गारिया, पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया, पूर्वी जर्मनी तथा सोवियत संघ ने ही भाग लिया। आज की तारीख में दुनिया के लगभग तमाम देशों की इस प्रतियोगिता में भागीदारी है। 1989 से ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ के प्रयास से हमारा देश भारत भी इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड में शामिल हो रहा है। सरकार ने पूरी जिम्मेदारी ‘नेशनल बोर्ड फॉर हायर मैथेमैटिक्स’ को दी हुई है। प्रतियोगिता में हमारे देश का प्रदर्शन अभी बहुत अच्छा नहीं है। इसका मुख्य कारण है यहां के विद्यार्थियों के बीच इसकी जानकारी की कमी।

इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड में आठवीं से लेकर बारहवीं कक्षा का कोई भी विद्यार्थी भाग ले सकता है। इसमे एलजेब्रा, नंबर्स थ्योरी, ज्योमेट्री , ग्राफ थ्योरी और प्रोबेबिलिटी से सवाल पूछे जाते हैं। प्रथम चरण में आपको ‘रीजनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड’ में भाग लेना होगा। सामान्य रूप से सितंबर और प्रत्येक वर्ष दिसंबर के पहले रविवार के बीच इसे आयोजित किया जाता है। पूरे देश में 20 क्षेत्रीय कार्यालय बनाये गए हैं और प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र बनाने का प्रयास किया जाता है।

देश के सभी 20 क्षेत्रीय केन्द्रों की जानकारी आप https://bit.ly/3cHgDdA वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रतियोगिता से कुछ विद्यार्थियों को दूसरे चरण के लिए चयनित किया जाता है।दूसरे चरण में ‘नेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड’ का आयोजन फरवरी के पहले रविवार को किया जाता है। इसमें सभी राज्यों के रीजनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड के चयनित विद्यार्थी भाग लेते हैं। इस प्रतियोगिता में शामिल 30-35 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। तीसरे चरण में सम्मानित विद्यार्थियों के लिए ‘नेशनल बोर्ड फॉर हायर मैथेमैटिक्स’ द्वरा स्पेशल ट्रेनिंग का आयोजन मई-जून के महीने में किया जाता है। यहां कई राउंड टेस्ट लेने के बाद 6 सबसे प्रतिभाशाली बच्चों को इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड के लिए चयनित किया जाता है। मैथेमैटिक्स के किसी एक अच्छे शोधकर्ता या शिक्षक को टीम लीडर तथा एक को डिप्टी लीडर बनाकर उन 6 बच्चों के साथ जिस देश में इंटरनेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड का आयोजन होता है, वहां भेजा जाता है। विदेश आने-जाने, रहने-खाने के सभी खर्च का वहन भारत सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय ही करता है।

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