क्या चल रहा है?

मास्क में रहा और सोशल डिस्टेंसिंग भी रखी, पर मुंह व हाथ धोने में कहीं चूक हो गई और कोरोना की चपेट में आ गया

  • नालंदा पीएचसी के प्रभारी डॉ. जहांगीर एनएमसीएच में कोरोना को हराने के बाद बिहारशरीफ लौट चुके हैं, फिलहाल होम क्वारेंटाइन हैं

पटना. 40-45 दिनों से बिहारशरीफ के मुहल्लों में बड़ा कोहराम था। कहीं से भी कॉल आ जाए कि फलां शख्स बाहर से आया है, जांच कीजिए। करीब महीनाभर से यह मगजमारी बहुत बढ़ गई थी। इन 45 दिनों के अंदर 50-60 अलग-अलग मुहल्लों में तो गया ही। लोग सब्र नहीं कर पा रहे थे। रात में कोई आया तो उसी वक्त चाहते कि आकर जांच करें। बहुत जगह रातभर उस शख्स को किसी कमरे में बंद करा दिया, लेकिन कई जगह लोग नहीं माने। रात में ही जाना पड़ा। पेशे से डॉक्टर हूं, इसलिए बिना मास्क के कहीं नहीं गया, चाहे कितनी भी जल्दी हो। मीटर भर दूरी तो हर जगह रखी। हाथ धोने में परहेज नहीं किया, लेकिन लगता है कि इसी में कहीं चूक हुई। किसी संक्रमित स्थल या सामान को छूने के बाद हाथ धोने से छूट गया हो और वायरस का शिकार हो गया।

थोड़ी भी असावधानी खतरनाक, अफवाहों से भी दूर रहना जरूरी

मैं और बिहारशरीफ थानाध्यक्ष रोज दिनभर इसी अफरातफरी में रह रहे थे। हमारे अस्पताल के लैब टेक्नीशियन बार-बार ताकीद कर रहे थे कि इतनी जगह जा रहे तो हम भी जांच करा ही लें। एक दिन इंस्पेक्टर कोरोना ने भी कह दिया- क्यों न हम भी जांच करा लें। उसी दिन किट से जांच कराई। इंस्पेक्टर निगेटिव निकले और मैं पॉजिटिव। जो 150 लोग बेतकल्लुफी से अक्सर मेरे आसपास रहा करते थे, सारे मेरे करीब आने से बचने लगे। तुरंत सिविल सर्जन को इत्तला दी गई। कोई लक्षण नहीं था, इसलिए शरीर में कोई तकलीफ नहीं, लेकिन यह सब मानसिक तनाव जरूर दे रहा था। खैर, सिविल सर्जन ने 19 अप्रैल को ही एनएमसीएच भेज दिया। यहां भी जांच पॉजिटिव रही और फिर आइसोलेशन में प्रोटोकॉल के तहत दवा वगैरह दी गई। 22 को दूसरी बार जांच हुई। 23 को आई रिपोर्ट निगेटिव रही। फिर 24 को जांच हुई और 25 को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 26 अप्रैल को डिस्चार्ज हो गया। मेरे पॉजिटिव आने के बाद घर के 11 लोगों पर भी खतरा था, सो उनकी भी जांच हुई है। रिपोर्ट आने वाली है।  मैंने हिम्मत नहीं हारी। दुनिया के आंकड़े, फर्जी खबरों पर नहीं, बिहार की हकीकत पर रहा।

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