क्या चल रहा है?

भरतपुर मुस्लिम महिला केस में नया मोड़, जांच टीम ने प्रीमेच्योर डिलीवरी को बताया वजह

  • मुस्लिम होने के कारण अस्पताल में भर्ती न करने का है आरोप
  • राजस्थान के भरतपुर में हुई थी नवजात की मौत, आई रिपोर्ट

राजस्थान के भरतपुर में शनिवार को कोरोना वायरस की वजह से विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुस्लिम नेता की पत्नी को भर्ती नहीं करने का मामला सामने आया. डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने की जगह जयपुर भेज दिया था. भरतपुर अस्पताल के बाहर एम्बुलेंस में चढ़ते समय ही अचानक डिलीवरी हो गई और नवजात की मौत हो गई. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आंतरिक कलह एक बार फिर उजागर हो गई है.

मामले को तूल पकड़ते देख मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जांच के आदेश दिए. अब जांच टीम की रिपोर्ट से इस मामले में नया मोड़ आ गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 32 साल की महिला की यह सातवीं डिलीवरी थी और इस बार गर्भ 6 महीने का ही था . प्रीमेच्योर डिलीवरी के लिए प्रसूता गंभीर हालत में अस्पताल आई, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया था. ब्लीडिंग रोकने के लिए चिकित्सकों ने इंजेक्शन दिए थे और महिला एंबुलेंस पर चढ़ ही रही थी कि उसी दौरान प्रसव हो गया. प्रीमेच्योर डिलीवरी की वजह से नवजात की मृत्यु हो गई.

उसके बाद भी ज्यादा खून बहने की वजह से महिला की हालत नाजुक देख चिकित्सकों ने अस्पताल में खून भी चढ़ाया था. अब जांच रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों को क्लीनचिट मिल गई है, लेकिन इसे लेकर कांग्रेस में आंतरिक राजनीति तेज हो गई है. राजस्थान सरकार के मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने फिर आरोप लगाया है कि गहलोत सरकार के अधिकारी महिला को धमका रहे हैं और सरकार के पक्ष में बयान देने के लिए कह रहे हैं. उन्होंने ट्वीट कर इसे डॉक्टरों की लापरवाही का मामला बताया. इसके बाद हड़कंप मच गया कि कोरोना वायरस की वजह से मुस्लिम महिला की डिलीवरी नहीं कराई गई और नवजात बच्चे की मौत हो गई.

उन्होंने कह, मामला बताया जा रहा है कि मुसलमानों में कोरोना वायरस ज्यादा हो रहा है, इसलिए डॉक्टरों ने मुसलमान महिला को अस्पताल में नहीं देखा. दरअसल यह पूरा मामला कांग्रेस के अंदरुनी सियासत से भी जुड़ा हुआ है. भरतपुर से आने वाले चिकित्सा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चहेते नेताओं में शामिल हैं. पर्यटन मंत्री और भरतपुर के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह उन्हें फूटी आंख नहीं सुहाते.

डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से सुभाष गर्ग का टिकट काट दिया था. माना यह जाता है कि अशोक गहलोत ने गर्ग को लोकदल का टिकट दिलवा चुनाव जीतने में भी मदद की. लोकदल के विधायक के तौर पर ही गर्ग को मंत्रीमंडल में भी शामिल किया. यह मामला गर्ग की जिम्मेदारी वाले विभाग से ही था, ऐसे में नाराज चल विश्वेंद्र सिंह को अपनी ही सरकार को घेरने का मौका मिल गया.

Source :aajtak.intoday.in

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