क्या चल रहा है?

बच्चों को किताबें मिलें तो लॉकडाउन के ट्रोमा से बाहर निकलें, इसके लिए प्रशासन-स्कूल-परिजन सब तैयार; परेशानी- आवश्यक सामानों की लिस्ट में किताबें ही नहीं

  • पिछली कक्षा की परीक्षा के दौरान ही लॉकडाउन, बच्चों के पास पढ़ने के लिए पूरा समय, लेकिन न तो उनके पास किताबें हैं न ये पता कि क्या और कैसे पढ़ेंगे
  • प्रशासन ने होम डिलिवरी के लिए दिया आदेश, पर ऑनलाइन वाहन पास मिलने में फंसा पेंच, कोरोना के चलते स्कूल नहीं जा पा रहे दुनिया के 157 करोड़ स्टूडेंट

पटना. लॉकडाउन का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों की पढ़ाई का हो रहा है। पिछले सत्र की परीक्षा के दौरान ही लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हो गए। अब नए सत्र के मद्देनजर हालात से निबटने के लिए ज्यादातर स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू कर दी लेकिन किताबों की कमी आड़े आने लगी। बच्चों को किताबें मिले तो वे लॉकडाउन के ट्रोमा से बाहर निकल सकते हैं। इसके लिए अब प्रशासन-स्कूल-परिजन सब तैयार हैं। पटना के डीएम कुमार रवि किताबाें की हाेम डिलीवरी के लिए आदेश भी जारी कर दिया है। लेकिन, मुश्किल यह कि होम डिलवरी वाले सामानों की लिस्ट में किताबें हैं ही नहीं। स्कूलों ने वाहन पास के लिए सदर एसडीओ कार्यालय से संपर्क भी साधा है। लेकिन किताबों के परिवहन के लिए पास चाहिए। वाहन पास लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। लेकिन, ऑनलाइन में आवश्यक सेवाओं की जो सूची है, उसमें किताब नहीं है।

संत माइकल ने कहा-काम कठिन, पर कोशिश कर रहे
सेंट माइकल हाई स्कूल के प्रिंसिपल फादर आर्मस्ट्रॉन्ग एडिसन एसजे ने कहा कि बच्चों को किताबें घर पर पहुंचाना कठिन है। एक बार जिला प्रशासन वाहन पास प्रदान कर दे तो हम किताबें वितरित करना शुरू कर देंगे। यह काम भले ही मुश्किल है लेकिन हम बच्चों तक किताबें हर हाल में पहुंचाएंगे।

डीएबी ने साइट पर डाली किताबें, नॉट्रेडेम में जल्द फैसला
नॉट्रेडेम एकेडमी बच्चियों तक किताबें घर पर पहुंचाने के बारे में सोमवार को फैसला लेगी।  निचली कक्षा की बच्चियों तक किताब पहुंचाने का रास्ता हम निकालने में जुटे हैं। एकेडमी की शिक्षिका आभा चौधरी ने बताया कि  हायर कक्षाओं में हम चैप्टरवाइज सिलेबस ऑनलाइन के माध्यम से प्रदान कर रहे हैं। उसी से पढ़ाई भी हो रही है। बच्चियों को होने वाली दिक्कतों का भी हमलोग ध्यान रख रहे हैं। वहीं, डीएवी बीएसईबी स्कूल ने कक्षा 3 से लेकर 8 तक के बच्चों की किताबें पीडीएफ फॉर्मेट में अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई हैं। एनसीईआरटी की किताबों के लिंक भी उपलब्ध करवाए गए हैं ताकि बच्चे घर से ही किताबें डाऊनलोड कर पढ़ सकें।

किताबें न मिलने से हो रहा नुकसान

पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि दिक्कत यह है कि स्कूल्स किताबें नहीं बेचते। सोमवार को इस मुद्दे पर स्कूलों के प्रिंसिपल्स के साथ बैठक है। हम अभिभावकों को मेसेज करें कि जो किताबों की होम डिलीवरी कर रहे हैं उनसे ले लें।

स्कूल एसडीओ से लें वाहन पास
किताबों की होम डिलीवरी की व्यवस्था करने का निर्देश जिलाधिकारी ने भी स्कूलों को दिया है। सभी स्कूल प्रबंधनों को कहा गया है कि किताब की होम डिलीवरी कराने की व्यवस्था करें, इसके लिए वाहन पास संबंधित एसडीओ से संपर्क कर प्राप्त करें।

पास मिलने का है इंतजार
हम होम डिलीवरी के लिए तैयार हैं। कई स्कूलों से बात हुई है,बाकायदा नोटिस भी बनाकर रखी हुई है। बच्चों का एड्रेस लेकर घर पर किताबें पहुंचाएंगे। -राहुल कुमार, एडमिन मैनेजर, ज्ञान गंगा लिमिटेड

कोरोना के चलते स्कूल नहीं जा पा रहे दुनिया के 157 करोड़ स्टूडेंट

दुनिया के 200 से ज्यादा देश इन दिनों कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहे हैं। करीब 17 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हैं, वहीं 1.10 लाख से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। पिछले साल दिसंबर में चीन से कोरोना फैलने के बाद अब तक 188 देशों में स्कूल, कॉलेज, िवश्वविद्यालयाें को बंद कर दिया गया है। इससे दुनिया के 157 करोड़ स्टूडेंट्स की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यूनेस्को और प्लान इंटरनेशनल ने आशंका जताई है कि कोविड-19 की वजह से दुनिया में स्कूल ड्रॉपआउट रेट यानी स्कूल छाेड़ने वाले बच्चों की संख्या काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर गरीब देशों के बच्चों पर होगा।

Source :www.bhaskar.com

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