क्या चल रहा है?

पीड़ितों का दर्द: बेटे की दवा लेने जाना पड़ा भारी, सिर में लगे 40 टांके, पिता की गई जान

  • हिंसा के बाद अपनों की तलाश में अस्पताल में भटक रहे हैं परिजन
  • ब्रह्मपुरी इलाके में भी कई लोग उपद्रवियों के हत्थे चढ़ गए

नई दिल्ली. नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के इलाकों में हुई हिंसा में उपद्रवियों ने किसी को नहीं बख्शा। जो भी राहगीर मिला, उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। ब्रह्मपुरी इलाके में भी कई लोग उपद्रवियों के हत्थे चढ़ गए। इनमें से कोई दवाई लेने जा रहा था तो कोई सुबह की सैर पर थी। भास्कर ने उस इलाके के कुछ लोगों से जानने की कोशिश की आखिर वह कैसे उपद्रवियों की चपेट में आ गए।

अरविंद नगर में रहने वाले नितिन कुमार और उनके पिता विनोद कुमार सोमवार 24 फरवरी की रात ब्रह्मपुरी में दवाई लेने गए थे। रास्ते में उपद्रवियों ने इन पर पथराव कर दिया। इससे भी इनका मन नहीं भरा तो लाठी-डंडो से हमला कर दिया। इसमें विनोद कुमार की मौत हो गई, जबकि नितिन का सिर फट गया, उसके सिर में 40 टांके हैं। उस भयावह रात के बारे में बताते हुए नितिन ने कहा कि बेटे की तबियत खराब थी और घर के आसपास की दुकानें बंद हो गई थीं। इस  के घर से दवाई की दुकान करीब आधा किलोमीटर दूर है। आसपास की दुकानें बंद थी इसलिए ब्रह्मपुरी दवाई लेने गए। हम दवाई की दुकान तक पहुंचे भी नहीं थे उससे पहले ही सामने लोगों की भीड़ थी उन्होंने हम पर पथराव कर दिया। हम बाइक से नीचे गिर गए। पत्थर इतनी तेजी से आ रहे थे कि हम जमीन पर गिर गए। इसके बाद पूरी भीड़ हमारे नजदीक आ गई और लाठी-डंडे से जानलेवा हमला कर दिया। मेरी बाइक में आग लगा दी। इसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं। अस्पताल में मेरी आंख खुली। सिर में 40 टांके आए हैं।

बेरहमी: रोज की तरह सुबह में सैर को निकले थे अतुल, भीड़ से गोली चली और पेट में घुस गई

अतुल गुप्ताब्रह्मपुरी इलाके में रहने वाले अतुल गुप्ता को रोज सुबह-सुबह सैर करने के लिए जाते हैं। मंगलवार 25 फरवरी की सुबह करीब 04:30 भी वह सैर के लिए निकले थे। घर से थोड़ी दूर बाहर ही उन्हें उपद्रवियों ने गोली मार दी। गुप्ता ने कहा कि एक्स ब्लॉक में शिव मंदिर के पास पहुंचने पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। मैं भीड़ के बीच से आगे बढ़ने लगा तो मुझे आगे जाने से रोक दिया। इस बीच किसी ने गोली चला दी, जोकि मेरे पेट में लगी। मैं बेहोश होकर नीचे गिर गया। आंख खुली तो मैं अस्पताल में था। मुझे नहीं पता कि मैं अस्पताल कैसे पहुंचा, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि गोली लगी है।

मजदूरी करने निकला सलमान नहीं लौटा 

सलमान

गाजीयाबाद  के भेंटा-हाजीपुर की रघुनाथ कॉलोनी में रहने वाला 25 वर्षीय भूरे उर्फ सलमान मंगलवार को काम पर दिल्ली आने के बाद घर नहीं लौटा। उसके बड़े भाई नबी जान ने बताया कि वह बदायू के रहने वाले है। सुबह 9 बजे गोकुलपुरी में मजदूरी का काम करने आया था। सलमान के दो बच्चे है। पत्नी की पांच साल पहले मौत हो गई। नबी जान ने बताया कि उसकी काफी तलाशने के बावजूद कहीं कोई जानकारी नहीं मिल रही है। जीटीबी की मोर्चरी में तलाशने के बावजूद पता नहीं चल रहा।

दुखद: बच्चे के लिए दूध लेने निकाला था प्रेमसिंह जीटीबी अस्पताल में मिला शव

प्रेमसिंह की पत्नी

बृजपुरी निवासी 27 वर्षीय प्रेमसिंह मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अपने बच्चे के लिए दूध लेने निकले, लेकिन फिर वापस ही नहीं लौटे। उनके परिजनों ने मोर्चरी में रखे शव की पहचान की। प्रेमसिंह की पत्नी सुनीता ने बताया कि उसके पति रिक्शा चलाते थे। वह तीन बच्चों के साथ सलेमपुर में रहते है। मंगलवार को उनके पति बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे। हमने मना किया कि आगे दंगा हो रहा है, लेकिन वह नहीं माने। लेकिन वह दंगा दूर होने की बात कहकर निकल गए। उनके चार बजे तक घर नहीं लौटने पर दयालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका शव जीटीबी अस्पताल में मिला।

नईमुद्दीन की तलाश में भटक रहा भाई

नईमुद्दीन का भाई

 
पुरानी दिल्ली से सोमवार को अपने घर के लिए निकले 45 वर्षीय नईमुद्दीन लापता है। नईमुद्दीन ने सोमवार को अपनी मां से बात कर कहा था कि वह उस्मानपुर पहले पुश्ते से घर आ जाएगा, लेकिन अभी तक नहीं पहुंचा। नईमुद्दीन के भाई नजीमुद्दीन रविवार को अपने भाई को खोजने जीटीबी अस्पताल आए, लेकिन उनको भाई नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनका भाई बुक बाइंडिंग का काम करता है। वह सोमवार को पुरानी दिल्ली से अपने घर जाफराबाद के लिए निकले थे। इस बीच दंगा शुरू हो गया।

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