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“तुम सरकारी नौकरी वालों को परेशान कर रहे हो”, कांग्रेस Lockdown के समय DA पर जमकर फ़ेक न्यूज़ फैला रही है

देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस से उपजी स्थिति के मद्देनजर केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को 1 जनवरी 2020 से देय महंगाई भत्ते या DA और केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों की महंगाई राहत की अतिरिक्त किश्त का भुगतान करने का फैसला लिया है। लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल यहाँ भी फेक न्यूज़ फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी यह फेक न्यूज़ फैला रही है कि केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता ही बंद कर दिया है। 

केंद्र सरकार के इस फैसले से 1.13 करोड़ कर्मचारी और पेंशनर प्रभावित होंगे। इनमें करीब 48 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर शामिल हैं। इस फैसले से केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में 37,530 करोड़ रुपए की बचत होगी जिससे कोरोना के खिलाफ मेडिकल उपकरणों की ख़रीदारी हो सकेगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि मौजूदा दर पर महंगाई भत्ते का भुगतान होता रहेगा, जो DA रोका जा रहा है उसका एरियर के तौर पर भुगतान भी नहीं होगा। 

यहाँ यह समझना आवश्यक है कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष मार्च में DA 17 प्रतिशत से 4 प्रतिशत बढ़ा कर 21 % कर देने की घोषणा की थी। लेकिन अब इसी बढ़ोतरी को कुछ समय के लिए रोका जा रहा है। कांग्रेस यह बताने की कोशिश कर रही है कि सरकार ने सभी DA को फ्रीज कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से सही नहीं है। केवल बढ़ाई गई राशि की अतिरिक्त किश्तों का भुगतान नहीं किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत भत्ते का भी भुगतान नहीं किया जाएगा। इस प्रकार, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को जून 2021 तक महंगाई भत्ते का भुगतान नहीं हो पाएगा। बता दें कि मोदी सरकार ने खर्च को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों लिए DA और DR में वृद्धि की है। अक्टूबर 2019 में, सरकार ने 1.13 करोड़ कर्मचारियों के लिए डीए को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया और इस वर्ष मार्च में सरकार ने भत्ते को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 21 प्रतिशत कर दिया था। इसलिए, एक वर्ष से कम की अवधि में, कर्मचारियों के लिए DA को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 21 प्रतिशत कर दिया गया था। 

लेकिन फिर भी कांग्रेस झूठ फैला रही है कि केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता ही रोक दिया है। 

वहीं, राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और केंद्रीय विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझकर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता (DA)काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है।’

अब इन्हें कौन समझाये कि सरकार ने DA रोका ही नहीं है। लेकिन कांग्रेस तो कांग्रेस है, यहाँ पढ़े लिखे भी राहुल गांधी के बराबर ही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, ‘सरकारी कर्मचारियों के भत्तों में कटौती नहीं की जानी चाहिएमैं मानता हूं कि ऐसे कठिन समय में भी केंद्रीय कर्मचारियों और सैनिकों पर ऐसा फैसला थोपना जरूरी नहीं है।’

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबम ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना कीउन्होंने कहा कि सरकार को केंद्रीय कर्मचारियों का  DA काटने से पहले बुलेट ट्रेन, सेंट्रल विस्टा जैसी परियोजनाएं रोकनी चाहिए थी कांग्रेस नेता वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मनीष तिवारी, सुप्रिया श्रीनाते, गौरव वल्लभ, रोहन गुप्ता और प्रवीण चक्रवर्ती ने भी यही सुर अलापा है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस को आसान भाषा समझ ही नहीं आती है। 

ट्विटर पर कई लोगों ने कांग्रेस के इस फेक न्यूज़ पर आईना दिखा दिया कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने लोगों से जबर्दस्ती पैसे जमा करवाए थे। 

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जनता का स्वस्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और उसी की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए सरकार के संसाधनों का सही उपायोग करने का समय है। इस मुद्दे पर छोटी राजनीति कांग्रेस को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाएगी।

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