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‘तब्लीगी जमात लोगों की जान बचाने के लिए Plasma डोनेट कर रहे हैं’, यह केवल एक घटिया PR स्टंट है

इसमें  कोई दो राय नहीं है कि भारत की वुहान वायरस से लड़ाई को तब्लीगी जमात के उत्पातों द्वारा काफी नुकसान पहुंचा है। जो मामले 10,000 के नीचे रह सकते थे, वो अब कुल 30000 का आंकड़ा पार कर चुका है।

ऐसे में पूरे देश में तब्लीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ आक्रोश की लहर उमड़ पड़ी। उनके चाटुकारों, विशेषकर वामपंथी बुद्धिजीवियों के लाख प्रयासों के बावजूद यह गुस्सा कम नहीं हुआ।  परन्तु अब एक नया अभियान प्रारम्भ किया गया है, जिसमें यें दिखाने का प्रयास किया गया है कि कैसे तब्लीगी जमात के सदस्य अपना सब कुछ दांव पर लगाकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि तब्लीगी के सदस्य भारी संख्या में अपना ब्लड प्लाज्मा डोनेट कर रहे हैं, ताकि वुहान वायरस से निपटने में आसानी हो ।

परन्तु जल्द ही इनका भांडा भी फूट गया। कल प्रेस से वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कैसे प्लाज्मा थेरेपी अभी भी अपने प्रारम्भिक स्टेज पर है, और यह कोई रामबाण इलाज नहीं है। इसे आईसीएमआर ने स्वीकृत नहीं किया है, फिलहाल, इसका प्रयोग अभी मरीजों पर किया जा रहा है।

जब एक व्यक्ति किसी महामारी से संक्रमित होता है, तो उसका शरीर तुरंत प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु एंटीबॉडी का सृजन करता है।  , जब मरीज एंटीबॉडी बना कर किसी वायरस को मात दे देता है, तो इसके बाद भी लंबे समय तक एंटीबॉडी प्लाज्मा के साथ उसके खून में मौजूद रहती हैं। इसके बाद ठीक हुए व्यक्ति के प्लाज्मा में मौजुद एंटीबॉडी को अन्य मरीजों पर उपयोग किया जा रहा है और उसको अंदर हुए बदलाव पर अध्ययन किया जा रहा है। परन्तु यह अभी प्रारम्भिक अवस्था में है, और इसपर काम होना बाकी है। केजरीवाल ने हाल ही में बयान दिया था कीं उन्हें केंद्र सरकार से अनुमति मिली है कि डॉक्टर कोरोना से ठीक हो चुके मरीज अपना प्लाज्मा डोनेट करें और मदद के लिए आगे आएं। परन्तु इस घोषणा में केजरीवाल ने पूरी बात नहीं बताई कि केंद्र सरकार ने केवल प्रयोग के लिए अनुमति दी है इस प्रक्रिया से कोरोना ठीक ही हो जायेगा उसकी कोई गारंटी नहीं है।

यदि ऐसी बात है, तो फिर जमाती इस डोनेट करने में क्यों लगे हुए हैं? दरअसल, तब्लीगी जमात की छवि वुहान वायरस के कारण रसातल में जा चुकी है। ऐसे में यदि प्लाज्मा थेरेपी सफल हो जाती, तो काफी हद तक इनकी छवि में ना सिर्फ सुधार आता, बल्कि हमारे लिबरल ब्रिगेड को अपनी अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति के लिए काफी मसाला मिल जाता, जो आप इनके ट्वीट्स में देख सकते हैं।

अब कई लोग ऐसे हैं जो जमातियों को सुपरहीरो के तौर पर पर प्रदर्शित करना चाहतें हैं। हालांकि, सच्चाई तो यह है कि जिन लोगों को कठघरे में होना चाहिए, उन्हें जबरदस्ती हीरो के तौर पर पेश किया जा रहा है, और यह एक घृणित PR एक्सरसाइज से ज़्यादा कुछ नहीं है। क्या हम भूल सकते हैं कि किस तरह इन जमातियों ने डॉक्टरों का जीना हराम कर दिया था?

इस कुत्सित प्रोपेगैंडा के सामने नतमस्तक होने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। यदि तब्लीगी जमात के बाशिंदे तांडव ना मचाते, तो शायद भारत दक्षिण कोरिया की भांति अब तक स्थिति को पूर्णतया नियंत्रण में कर चुका होता।

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