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डॉक्टरों के संघर्ष को सलाम और सच्चा ट्रिब्यूट देती हैं ये बॉलीवुड फिल्में

जब पूरा देश इस समय कोरोना के खिलाफ एकजुट हो रहा है, जब हर कोई इस वायरस को हराने का प्रण ले रहा है, ऐसे वक्त में भी हमे अपने कोरोना वॉरियर्स को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि उन्हीं की बदौलत हम इस जंग को जीतने की कोशिश कर पा रहे हैं. इन कोरोना वॉरियर्स में सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं हमारे वो डॉक्टर जो इस समय अपने परिवार से दूर दूसरों को बचाने में लगे हुए हैं.

आज जब देश के डॉक्टर अपनी जान की बाजी लगा दूसरों की जान बचा रहे हैं, ऐसे में उन फिल्मों के बारे में जानते हैं जहां बॉलीवुड ने दिया था डॉक्टरों को सच्चा ट्रिब्यूट, दिखाए थे उनकी जिंदगी के संघर्ष-

डॉक्टर कॉन्टिस की अमर कहानी

1946 में रिलीज हुई फिल्म डॉक्टर कॉन्टिस की अमर कहानी हर मायने में डॉक्टर्स को सच्चा ट्रिब्यूट देती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक डॉक्टर को विश्व युद्ध 2 के वक्त चीन भेजा जाता है जिससे वो वहां लड़ रहे सैनिकों का इलाज कर सके. अब चीन में उस डॉक्टर की सबसे बड़ी सफलता ये रहती है कि वो जानलेवा प्लेग को कंट्रोल भी कर लेता है और उसका इलाज भी ढूंढ लेता है. लेकिन फिल्म के अंत में दिखाया जाता है कि वो डॉक्टर खुद उस प्लेग के चलते मर जाता है.

आनंद

अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म आनंद में भी डॉक्टर की जिंदगी और उनके कमिटमेंट को बड़ी ही खूबसूरती से दिखाया गया है. फिल्म में अमिताभ बच्चन एक डॉक्टर का रोल अदा कर रहे हैं. फिल्म में दिखाया जाता है कि जब डॉक्टर अपने मरीज का इलाज मेडिकल सिस्टम के माध्यम से नहीं कर पाता है तो वो दूसरे तरीको की खोज करता है. लेकिन उसका उदेश्य एक ही होता है- उस मरीज की जान बचाना. फिल्म में दिखाया गया है कि एक डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास और उम्मीद का रिश्ता होता है.

एक डॉक्टर की मौत

एक्टर पंकज कपूर की फिल्म एक डॉक्टर की मौत उन डॉक्टरों के दर्द को दिखाती है जो पूरी जिंदगी मेहनत तो करते हैं लेकिन उन्हें उसका श्रेय नहीं मिलता. फिल्म में दिखाया गया है कि एक डॉक्टर काफी कम उम्र में एक खतरनाक बीमारी की वैक्सीन तैयार कर लेता है. इसके चलते वो पूरी दुनिया में काफी फेमस हो जाता है. लेकिन देश में उस डॉक्टर को खूब परेशान किया जाता है और जलील करके एक छोटे गांव में उसका ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसके चलते उसे पता चलता है कि जो वैक्सीन उसने खोजी थी उसका क्रेडिट किसी दूसरे ही वैज्ञानिकों को दे दिया जाता है. लेकिन अंत में उस डॉक्टर को अपनी मेहनत का फल मिलता है और समाज के कल्याण के लिए काम करता रहता है.

मुन्ना भाई एम बीबी एस

राजकुमार हिरानी की ये फिल्म बेहतरीन थी और संजय दत्त का रोल यादगार. इस फिल्म के जरिए दिखाया गया था कि जब हर दवाई काम करना बंद कर देती है उस वक्त भी चमत्कार हो सकते हैं. विश्वास की ताकत पर किसी का भी इलाज किया जा सकता है. फिल्म में दिखाया जाता है कि मुरली अपने पिता की नजरों में एक नकली डॉक्टर बनने का नाटक तो करता है, लेकिन साथ ही साथ अपने अनोखे अंदाज में हर किसी की जिंदगी में खुशियां भरता है. फिल्म में वो बार-बार सर्विस बिफोर सेल्फ के धर्म का पालन भी करता है.

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अरमान

2003 में दिनेश गांधी की फिल्म अरमान आई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, ग्रेसी सिंह ने अहम रोल निभाया था. फिल्म में तीनों डॉक्टर के किरदार में थे. अब डॉक्टरों की जिंदगी में क्या-क्या दुविधा हो सकती है, कब डॉक्टर भी धर्म संकट में फंस सकते हैं, इन सभी सवालों पर रोशनी डालती है फिल्म अरमान. फिल्म में दिखाया गया है कि अमिताभ बच्चन स्टेट ऑफ आर्ट अस्पताल बनवाना चाहते हैं लेकिन उनके पास पैसे नहीं है. वहीं अनिल कपूर को अपने पिता के सपने को पूरा कर डॉक्टर भी बनना है और वो एक लड़की से प्यार भी करते हैं. उनको दोनों में से किसी एक को चुनना है. फिल्म में ऐसी तमाम चीजें दिखाई जाती हैं जिसकों देख डॉक्टरों की दुविधाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है.

Source :aajtak.intoday.in

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