क्या चल रहा है?

…जब मणिकर्णिका घाट पर जलते शवों को निहारते रह गए थे बॉलीवुड के लवर बॉय, कहा था- यहां जैसी शांति कहीं नहीं

  • साल 1996 में ऋषि अपने भाई रणधीर के साथ काशी आए थे, शरद पूर्णिमा पर कराया था धार्मिक अनुष्ठान
  • काशी विश्वनाथ मंदिर में किया था रुद्राभिषेक, वाराणसी रोलर स्पोर्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने भ्रमण कराया था

वाराणसी (अमित मुखर्जी). उत्तर प्रदेश में वाराणसी रोलर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश डोगरा बॉलीवुड के लवर बॉय रहे ऋषि कपूर की मौत से मर्माहत हैं। जब से उन्होंने ऋषि कपूर के निधन की खबर सुनी है तो उनके साथ बिताए पलों को यादकर भावुक हो उठते हैं। दैनिक भास्कर ने राजेश से बात की। उन्होंने ऋषि कपूर व काशी से जुड़े पांच किस्से सुनाए। कहा- उनमें एक सादगी थी। उन्हें कोई पहचान न पाए, इसलिए वे बिना किसी सुरक्षा के एक आम आदमी की तरह काशी की गलियों में घूमे थे।

किस्सा 1: पहचान नहीं पाए थे शटर की चाभी
राजेश डोगरा कहते हैं- “बात 1996 की है, शरद पूर्णिमा पर ऋषि कपूर अपने भाई रणधीर कपूर के साथ धार्मिक अनुष्ठान के लिए काशी आए थे। हमारे गुरु अशोक द्विवेदी के यहां वो आए थे। उन्होंने उनके घर पर शटर की बड़ी चाभी (भुनासी) को देखकर अचरज में पड़ गए थे। उसे हाथों में लेकर ऋषि कपूर ने पूछा कि ये क्या चीज है? जब उन्हें बताया गया कि ये चाभी है, जिसे काशी में भुनासी कहा जाता है। यह सुनते ही ऋषि खूब हंसे।”

किस्सा 2: मणिकर्णिका पर जलते शवों को देखते रह गए थे
“अगले दिन ऋषि ने नौका विहार किया था। अस्सी घाट से नाव पर सवार होकर गंगा बिहार मणिकर्णिका होते राज घाट तक गए थे। मणिकर्णिका घाट पर जलते शवों को देखकर वे कुछ देर चुप रहे। बाद में उन्होंने कहा- ये अद्भुत लगता है। बनारस इसीलिए पर्यटन का केंद्र हैं। यहां की इमारतें कुछ न कुछ कहानी बयां करती हैं। गंगा के साथ इतनी इमारतों का दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिल सकता है।”

ये तस्वीर सारनाथ की है। यहां ऋषि कपूर व उनके भाई रणधीर कपूर को लोगाें को पहचान लिया तो उन्होंने सभी से मुलाकात कर उनका अभिवादन स्वीकार किया था। बेहद सादगी से उन्होंने यहां कुर्ता पजामा में भ्रमण किया।- फाइल फोटोकिस्सा 3: एंबेसडर गाड़ी से घूमी थी काशी की गलियां

“धार्मिक अनुष्ठान के अगले दिन ऋषि ने काशी घूमने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा था कि, हमें कोई पहचान न पाए इसलिए सुरक्षा गार्ड नहीं रहेंगे। एक गाड़ी से हम लोग घूमेंगे। इसके लिए एक एंबेसडर गाड़ी का इंतजाम किया गया था। वे किसी साधारण व्यक्ति की तरह काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे थे। पंडित अशोक द्विवेदी ने उनका रुद्राभिषेक कराया था।”

किस्सा 4: मन को भा गई थी बिरहा की संगीत
“शाम का वक्त था। ऋषि होटल ताज से कार में सवार होकर रविन्द्रपुरी से गुजर रहे थे। तभी उन्हें लाउड स्पीकर पर बिरहा संगीत की आवाज सुनाई दी। उन्होंने कार को धीमे करवाकर पूछा कि ये क्या हो रहा है? जब उन्हें बताया कि ये बिरहा है, जिसे इधर की लोक संगीत कहा जाता है तो वे बड़े खुश हुए। कहने लगे कि, इसको फिल्मों में भी जोड़ना चाहिए। इस कला का बड़े पर्दे पर भी प्रदर्शन होना चाहिए।”0

किस्स 5: काशी जैसी शांति कहीं नहीं
“इसके बाद वहां से सारनाथ हम लोग चले गए। वहां मंदिरों में दर्शन पूजन के बाद धम्मेका स्तूप को बहुत देर तक देखा गया। यहां कुछ लोगों ने उन्हें पहचान लिया तो भीड़ उमड़ पड़ी। बावजूद इसके उन्होंने किसी भी सुरक्षा से मना कर दिया था। सिर्फ एक सिपाही साथ था। यहां बेहद सादगी से ऋषि ने लोगों से मुलाकात की और एयरपोर्ट निकल गए। जाते समय यही कहा था कि दुनिया में कहीं शांति है तो वह काशी है।”

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