क्या चल रहा है?

कोरोना से आरएमएल अस्पताल की हालत डाउन, अब सफदरजंग व लेडी हार्डिंग रेफर करेंगे मरीज

  • समस्या: कोरोना से कुल 59 मौतों में से अकेले आरएमएल अस्पताल में 26 मरीजों की मौत
  • दलील: अस्पताल प्रशासन बोला- बहुत से मरीज क्रिटिकल कंडीशन में यहां आते हैं
  • जिम्मेदारों ने यह बताई वजह: सीरियस मरीजों का ज्यादा दबाव

नई दिल्ली. केंद्र सरकार का राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली में कोरोना से मौतों का हॉट-स्पॉट बन गया है। राजधानी में कोरोना से अब तक हुईं 59 में से 26 मौत अकेले इस अस्पताल में हुई हैं। यहां ज्यादा मौतों का कारण अस्पताल पर सीरियस मरीजों का ज्यादा दबाव बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी यह बात मानी है कि अस्पताल पर सीरियस मरीजों का ज्यादा दबाव है।
दिल्ली में सबसे पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों का इलाज होना शुरू हुआ था। केंद्र सरकार ने यहां आइसोलेशन वार्ड बनाया था। इसके बाद सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, लोकनायक, राजीव गांधी आदि अस्पतालों में कोरोना के इलाज की व्यवस्था हुई। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना वार्ड तो है लेकिन इसकी क्षमता कम है। 50 से ज्यादा मरीज यहां कभी भर्ती नहीं रहे लेकिन यहां कोरोना मरीजों की मौत का आंकड़ा ज्यादा है। दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार तक 59 मौतों में से अकेले इस अस्पताल में 26 मौत हुई हैं। अ

स्पताल प्रशासन का कहना है कि बहुत से मरीज बहुत क्रिटिकल कंडीशन में अस्पताल में आए इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल पर कोरोना के सीरियस मरीजों का ज्यादा दबाव होने की बात केंद्र सरकार ने भी मानी है। इसके चलते सरकार ने आरएमएल को यह अधिकार दिया है कि वह सीरियस मरीजों को सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पताल के लिए रेफर कर सकते हैं और इन अस्पतालों को वह मरीज लेना होगा।

बदलाव :अब तीनों अस्पतालों पर मरीजों का बराबर दबाव आएगा

केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है ऐसा जानकारी में आया है कि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल, सफदरजंग और लोकनायक से जैसे सीरियस मरीज या फिर कई बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भर्ती करने से मना कर रहे हैं। थोड़ी बहुत ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीज को भी मना किया जा रहा है। इसकी वजह से राम मनोहर लोहिया अस्पताल पर सीरियस मरीजों के इलाज का ज्यादा दबाव होता है।

आदेश में कहा गया है कि आरएमएल तो 100 फीसदी संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अन्य अस्पताल सिर्फ 40-50 फीसदी। इसे ध्यान में रखते हुए सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पताल को सलाह दी जाती है कि वह आरएमएल की ओर से रेफर किए गए मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज करें, ताकि तीनों अस्पतालों पर मरीजों का बराबर दबाव आए।
कोरोना के इलाज के लिए 2 और प्राइवेट अस्पतालों को मंजूरी

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के लिए बिस्तरों की कमी के कारण दो और प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना के लिए तय किया है। इसमें एक सर गंगाराम सिटी हॉस्पिटल (120 बिस्तर) और महा दुर्गा चैरिटेबल हॉस्पिटल (100 बिस्तर) को कोरोना इलाज के लिए तय किया है। इन दोनों प्राइवेट अस्पताल में एडमिशन लेने वालों को खर्च का भुगतान खुद ही करना होगा।

इधर, दिल्ली सरकार ने जारी किया आदेश : निजी अस्पताल या क्लीनिक में इलाज के लिए मना किया तो होगी कार्रवाई

इलाज के लिए मना करने वाले प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक की अब खैर नहीं। इस संबंध दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्त आदेश जारी किया गया है। इसमें कड़ी कार्रवाई करने की बात की गई है। इससे पहले सरकारी अस्पतालों के लिए भी यह आदेश निकल चुका है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक लोगों का इलाज नहीं कर रहे। खासतौर पर डायलिसिस, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, कीमोथैरेपी और प्रसव कराने में आनाकानी कर रहे हैं। इसके पीछे वह कोरोना संक्रमण होने को कारण बताते हैं।

आदेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से सख्त हिदायत है कि लॉकडाउन के समय जरूरी चीजों में हेल्थ सर्विस टॉप पर हैं। नॉन कोविड मरीजों को इस दौरान इलाज मिलने में दिक्कत नहीं आने चाहिए इसलिए यह संचालित रहें। मगर पता चल रहा है कि प्राइवेट अस्पताल इलाज के लिए मरीजों को मना कर रहे हैं और मरीजों को दिक्कत हो रही है। कुछ डॉक्टरों ने अपने क्लीनिक बंद भी कर रखे हैं। मगर अब इलाज के लिए मना करना और संस्थान अस्पताल या क्लीनिक चालू नहीं रहने की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पतालों में कोरोना मरीजों की डेथ

अस्पतालमौत
अपोलो7
लोकनायक 5
सफदरजंग4
एम्स2
राजीव गांधी2
मैक्स  2
गंगाराम1
अन्य या घर10

अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए विशेष वार्ड भी है

^अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए विशेष वार्ड है। यहां आने वाले मरीजों के लिए इलाज के लिए डॉक्टर तय हैं। कई बार अस्पताल में आने वाले मरीज बहुत सीरियस होते हैं। डॉक्टर उनके इलाज में पूरी जान लगा देते हैं। मगर मरीज की स्थिति ऐसी होती है कि उस पर इलाज काम नहीं कर पाता। ऐसे में उसकी मौत हो जाती है।
स्मृति  तिवारी, प्रवक्ता, आरएमएल 

सबसे नया

To Top
//stawhoph.com/afu.php?zoneid=3256832