क्या चल रहा है?

कोरोना वायरस ने करीब 4 अरब लोगों को घरों में किया कैद

  • COVID19 केस 6 मार्च को 100 हजार के आकंड़े को किया पार
  • दुनिया भर में 5 अप्रैल को कोरोना वायरस के 12 लाख केस रिपोर्ट

दुनिया भर में एक महीने से भी कम समय में कोरोना वायरस केस दस गुना हो गए. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी डेटाबेस के मुताबिक, COVID19 केस 6 मार्च को 100 हजार के आकंड़े को पार कर गए थे. वहीं 5 अप्रैल (दोपहर 2 बजे) को दुनिया भर में करीब 12 लाख कोरोना वायरस केस रिपोर्ट हो चुके हैं. करीब ढाई लाख लोग रिकवर (ठीक) भी हो चुके हैं. वहीं 65,000 से ऊपर मौतें हो चुकी हैं.

ज्ञात इलाज या वैक्सीन के अभाव में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने की वजह से तमाम देशों को महामारी रोकने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है. अपने क्षेत्र में केसों की संख्या छोटी हो या बड़ी, सभी देश उपाय कर रहे हैं.

इंडिया टुडे डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने 180 देशों (2 जलपोत भी) के डेटा का विश्लेषण किया, जहां कम से कम एक कोरोना वायरस केस रिपोर्ट हो चुका था. DIU ने ये भी साथ चेक किया कि इन देशों ने लॉकडाउन लागू किया या नहीं. या फिर स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए फुल कर्फ्यू का सहारा लिया गया. विश्लेषण से सामने आया कि इस वक्त दुनिया में 3.9 अरब लोग अपने घरों में ही रहने को बाध्य हैं. यानि दुनिया की आधी आबादी लॉकडाउन में है.

हमारा विश्लेषण दिखाता है कि 180 देश, जिनमें से 116 ने या तो पूरे राष्ट्र में या फिर प्रभावित इलाकों को या एक खास आयुवर्ग के लिए पूरी तरह लॉकडाउन कर रखा है. बाकी 64 देशों ने या तो आंशिक कर्फ्यू (सूर्यास्त से सूर्योदय तक) का ऐलान कर रखा है या लोगों से स्वेच्छा से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा है.

अमेरिका

उत्तरी अमेरिका में तीन बड़े देश आते हैं- अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको. अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावित देश है. यहां 3 लाख से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, जो पूरी दुनिया के Covid19 केसों का एक चौथाई है.

हालांकि, उत्तरी अमेरिका में किसी भी देश ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान नहीं किया है. अमेरिका के 50 राज्यों में से 41 ने लोगों को घरों में रहने के लिए कहा है. बता दें कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान करने से इनकार किया है.

पड़ोसी देश मैक्सिको ने लचीले लॉकडाउन का रास्ता अपनाया है. यहां सरकार ने लोगों से घरों में रहने के लिए कहा है, लेकिन कर्फ्यू नहीं लगाया है.

कनाडा ने भी लोगों से घरों में रहने के लिए कहा है, लेकिन यहां भी सरकार ने पूरी तरह लॉकडाउन की संभावना से इनकार किया.

सेंट्रल और लैटिन अमेरिकी देशों ने हालांकि सख्त उपाय किए हैं, जबकि इन देशों में केसों की संख्या अमेरिका से कहीं कम है.

पनामा लिंग के हिसाब से लॉकडाउन का पालन करा रहा है. यहां महिलाओं को सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को आवश्यक सामान खरीदने के लिए घर से बाहर निकलने की इजाज़त मिलती है. वहीं पुरुषों को मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ये छूट रहती है. रविवार को सभी को घरों में रहना होता है.

लगभग पूरा दक्षिण अमेरिका लॉकडाउन है. ब्राजील और चिली ने अपने कुछ निश्चित क्षेत्रों में लॉकडाउन किया है. वहीं कोलंबिया, इक्वाडोर, वेनेजुएला, अर्जेंटीना, बोलिविया और पैराग्वे में अनिवार्य लॉकडाउन है. उरुग्वे ने लॉकडाउन नहीं किया है, लेकिन सख्त पाबंदियां लगाई हैं.

हालांकि कोलंबिया में लॉकडाउन अनिवार्य है लेकिन किसान अपनी जान खतरे में डालकर कर्फ्यू में भी फसलों की कटाई कर रहे हैं.

दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील के राष्ट्रपति ने महामारी को ‘लिटिल फ्लू ’ करार दिया है और वे देश में लंबे लॉकडाउन के विचार के आलोचक रहे हैं.

एशिया

ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी कोरिया में अब तक कोरोना वायरस का कोई केस सामने नहीं आया है. जापान में अब तक 300 पुष्ट केस रिपोर्ट हुए हैं लेकिन उसने अभी तक लॉकडाउन जैसा कोई एलान नहीं किया है. लेकिन वहां स्टोर्स के स्वेच्छा से ही बंद रहने की रिपोर्ट हैं.

दक्षिण कोरिया ने ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग पर जोर दिया है. ये ऐसा देश है जिसने बिना कठोर लॉकडाउन के ही वायरस पर काफी हद तक नियंत्रण में रखने में कामयाबी पाई है.

सिंगापुर भी ऐसे देशों में शामिल है जिसने अभी तक लॉकडाउन का एलान नहीं किया है लेकिन ये देश भी कर्व को सीधा रखने में सफल हुआ है. हालांकि शुक्रवार को सिंगापुर ने भी एक महीने के लॉकडाउन का ऐलान किया.

ईरान वायरस को नियंत्रण में रखने में नाकाम रहा है. इस देश के बहुत ज्यादा प्रभावित होने के बावजूद यहां कि सरकार पूरी तरह से लॉकडाउन लागू करने की इच्छुक नहीं है.

भारत में अब तक 3,000 से ज्यादा पुष्ट केस सामने आ चुके हैं. भारत ने 25 मार्च से देश भर में पूरे लॉकडाउन को लागू किया. उस वक्त देश में 600 कोरोनावायरस पुष्ट केस ही रिपोर्ट हुए थे. पड़ोसी देश पाकिस्तान में कुछ क्षेत्रों में लॉकडाउन लागू है.

कोरोनावायरस का इपिसेंटर माने जाना वाला चीन का वुहान प्रांत अब दोबारा खुद को खोल रहा है. ऐसा चीन की ओर से वायरस पर कामयाबी से काबू पाने के बाद संभव हो सका.

सऊदी अरब ने मक्का की जियारत को रोक दिया और मार्च के अंत से देश में आवाजाही को सीमित कर दिया. इस देश में बहुत कम केस होने के बावजूद ऐहतियातन जल्दी कदम उठाए गए.

तुर्की ऐसा देश है जहां दुनिया भर में सबसे तेजी से केस बढ़ रहे हैं. लेकिन तुर्की ने अभी तक पूर्ण लॉकडाउन का एलान नहीं किया है. यहां एक निश्चित आयुवर्ग के लोगों को घरों में रहने के लिए कहा गया है.

रूस ने भी लॉकडाउन का एलान किया है. रूस 11 टाइम जोन्स में सर्विलांस टेक्नोलॉजी जैसे कि सीसीटीवी, फोन डेटा, मोबाइल लोकेशन के जरिए कर्फ्यू लागू करा रहा है.

दिलचस्प है कि चीन से सटे मोंगोलिया ने 27 जनवरी को ही चीन से लगती सीमाएं बंद कर दी थीं.

यानी वुहान को चीन की ओर से सील किए जाने के चार दिन बाद ही मोंगोलिया ने ये कदम उठाया. मोंगोलिया में अब तक 14 पॉजिटिव केस सामने आए हैं. इस देश में इस बीमारी से एक भी मौत रिपोर्ट नहीं हुई है.

यूरोप और अफ्रीका

दुनिया के किसी भी महाद्वीप से ज्यादा मौतें यूरोप में इस महामारी से हुई हैं. दुनिया भर से 5 अप्रैल तक जो 65,000 से ज्यादा मौत रिपोर्ट हुई हैं, उनमें करीब 40,000 इटली, स्पेन, फ्रांस और यूके में ही हुई है. इन सभी देशों में पूरी तरह से लॉकडाउन अमल में लाया जा रहा है.

यूरोप का अधिकतर हिस्सा लॉकडाउन है, लेकिन सख्ती का स्तर देश-देश में अलग-अलग है.

जहां स्पेन, इटली, फ्रांस और यूके ने लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है, वहीं पूरे यूरोप के लिए ये बात लागू नहीं होती. मिसाल के तौर पर नीदरलैंड्स ने ‘इंटेलीजेंट’ लॉकडाउन लगा रखा है.

यहां स्वेच्छा से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है. साथ ही उन कारोबारों को बंद कर रखा है जहां छूने की संभावना होती है. जैसे सैलून्स, रेड लाइट एरिया आदि.

स्वीडन “Laissez Faire” रुख अपना रहा है. ये यूरोप का अकेला देश है जहां सार्वजनिक स्थल अब भी खुले हैं.

अफ्रीकी महाद्वीप, जो हाल में इबोला बीमारी को देख चुका है, यहां अनेक देशों ने सख्त लॉकडाउन कर रखा है जबिक यहां पुष्ट कोरोनावायरस केसों की संख्या बहुत कम है.

दक्षिण अफ्रीका इस महाद्वीप में सबसे ज्यादा प्रभावित देश है लिहाजा इसने खुद को पूरी तरह लॉकडाउन कर रखा है. पड़ोसी देशों जिम्बाब्वे और लेसोथो ने भी यही रास्ता अपनाया है.

अफ्रीका में अधिकतर देशों ने आंशिक कर्फ्यू का ऐलान किया है ये सूर्यास्त से सूर्योदय तक लागू रहता है. यहां लोगों के आने-जाने पर सख्त पाबंदी है.

केन्या में कर्फ्यू के पहले दिन पुलिस को भीड़ को काबू में रखने के लिए आंसू गैस छोड़नी पड़ी.

केन्या में अब तक 126 केस सामने आए हैं और 4 मौत हो चुकी हैं.

ओशेनिया

इस क्षेत्र के दो बड़े देश ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड हैं. ये दोनों ही लॉकडाउन हैं.

न्यूज़ीलैंड में सरकार को अभी ये तय करना है कि वो मौजूदा लॉकडाउन को आगे बढ़ाएगा या नहीं. देश में अब तक 952 से ज्यादा केस सामने आए हैं. ऑस्ट्रेलिया में भी लॉकडाउन लागू है, लेकिन यहां हर क्षेत्र ने अपने हिसाब से पाबंदियां लगा रखी हैं.

दक्षिण पैसेफिक में पापुआ न्यू गिनी ऐसा देश है, जहां अब तक सिर्फ Covid19 का एक ही पुष्ट केस सामने आया है, फिर भी यहां ‘मेडिकल इमरजेंसी ’ घोषित कर दी गई है.

Source :aajtak.intoday.in

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