किस्से

कोरोना को मात देने वाले बिहार के पहले शख्स बने राहुल, कहा- बुलंद हौसले से जीती जंग

  • पटना के फुलवारी शरीफ के रहने वाले हैं राहुल कुमार
  • स्कॉटलैंड से लौटे राहुल पाए गए थे कोरोना पॉजिटिव

कोरोना वायरस ने हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. यह वायरस कई लोगों की जान भी ले चुका है, लेकिन कुछ लोग अपनी इच्छाशक्ति से इस वायरस को भी मात दे रहे हैं. अब ऐसा ही मामला बिहार के पटना में देखने को मिला है. पटना के फुलवारी शरीफ निवासी राहुल कुमार को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है और वो अब अपने घर पर हैं.

राहुल अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं. मगर फिर भी उन्होंने एहतियातन अपने आपको 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा है. राहुल बिहार के पहले मरीज हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस को मात देते हुए जिंदगी की जंग को जीता है. आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में राहुल कुमार ने बताया कि उन्होंने कैसे पिछले दो हफ्तों में कोरोना वायरस से जंग लड़ी और उसको मात दी.

दरअसल, राहुल स्कॉटलैंड में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते थे. जब वहां कोरोना वायरस का खतरा बढ़ना शुरू हुआ, तो राहुल कुमार ने स्वदेश लौटने में ही अपनी भलाई समझी. वो 19 मार्च को लंदन के रास्ते स्कॉटलैंड से मुंबई वापस आ गए.

राहुल ने बताया कि भारत वापस आने तक उसके शरीर में कोरोना वायरस के कोई भी लक्षण नहीं थे. इसी वजह से मुंबई एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग में उनको क्लीन चिट मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने पटना के लिए अगली फ्लाइट पकड़ी और वापस घर आ गए थे.

राहुल का कहना है कि स्कॉटलैंड से मुंबई आने के दौरान प्लेन में वो कई विदेशी नागरिकों के संपर्क में आए थे. लिहाजा पटना आते ही उन्होंने कोरोना वायरस की जांच कराने का फैसला लिया था और 20 मार्च को पटना एम्स गए थे.

एम्स के आइसोलेशन वार्ड से चले गए थे घर

राहुल के यह बताने के बाद कि वो स्कॉटलैंड से लौटे हैं, तो डॉक्टरों ने उनको अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया. राहुल ने बताया कि एम्स में आइसोलेशन वार्ड की हालत इतनी बदतर थी कि 6 घंटे के अंदर ही वो वहां के डॉक्टरों को जानकारी देने के बाद घर लौट आए. 21 मार्च को राहुल के फुलवारी शरीफ स्थित आवास पर अचानक से पटना प्रशासन के लोग पहुंच गए और उसे वहां से सीधा नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करा दिया.

प्रशासन ने राहुल को फिर पहुंचाया नालंदा मेडिकल कॉलेज

प्रशासन के इस कदम के पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि इस बात की अफवाह उड़ गई कि पटना एम्स से कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज फरार हो गया है. राहुल का कहना है कि पटना एम्स के आइसोलेशन वार्ड में रहने के दौरान मुझे लगा कि अगर मैं ठीक भी हूं और यहां रहूंगा, तो बीमार पड़ जाऊंगा. इसीलिए मैं घर वापस आ गया. मगर अगले ही दिन पटना प्रशासन के लोगों ने मुझे नालंदा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया.

राहुल बोले- मैंने कोरोना को हराने की ठान ली थी

उसी दिन नालंदा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने राहुल कुमार की जांच के लिए सैंपल लिए और उसे राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजा. उसी शाम राहुल कुमार की रिपोर्ट भी आ गई, जिसमें उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई. राहुल का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव की जानकारी मिलने के बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी और ठान लिया कि मैं इस लड़ाई को जीत कर ही बाहर निकलूंगा.

राहुल बताते हैं कि अस्पताल में धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ और इसके बाद डॉक्टरों ने फिर से उनकी दो बार कोरोना जांच कराई. हालांकि दोनों ही बार उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई और फिर एक अप्रैल को उनको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया. राहुल फिलहाल अपने घर पर हैं. मगर एहतियातन अपने आपको 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा है, ताकि वो पूरी तरीके से स्वस्थ हो जाएं और उनके जरिए कोई अन्य व्यक्ति संक्रमित न हो.

कोरोना वायरस को मात देने वाले बिहार के इस पहले मरीज का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो लॉकडाउन लागू किया है, उसका लोगों को पूरी तरीके से पालन करना चाहिए, तभी कोरोना वायरस जैसे जानलेवा वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.

Source :aajtak.intoday.in

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