क्या चल रहा है?

काेराेना काल में वायरल हुए फेक न्यूज में 65 फीसदी समाज में तनाव भड़काने वाले, मकसद सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना

  • वाट्सएप से भी आगे निकल गई बिहार में फेसबुक की फेक यूनिवर्सिटी
  • फर्जी खबरों के मामले में शाहाबाद और मुजफ्फरपुर पुलिस रेंज आगे

पटना. फर्जी खबरों के मामले में वाट्सएप को बड़ा प्लेटफॉर्म माना जाता है, लेकिन बिहार में फेसबुक पोस्ट के जरिए ऐसी खबरें ज्यादा फैलाई जा रही हैं। कोरोना काल में वायरल फर्जी खबरों की भास्कर पड़ताल में यह सामने आया है। पुलिस ने जिन 104 मामलों में केस दर्ज किए हैं, उनकी केस हिस्ट्री से सामने आया कि करीब 64.91 प्रतिशत फर्जी खबरें धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए वायरल की गई थीं। इस फर्जीवाड़े में मुजफ्फरपुर और शाहाबाद पुलिस रेंज एक-दूसरे को टक्कर देते हुए अन्य सभी से बहुत आगे हैं।

20 जिलों से जुड़े 57 मामलों की पूरी केस हिस्ट्री निकालने पर सामने आया कि 37 केस सिर्फ धार्मिक हिंसा-तनाव के लिए वायरल किए गए थे। कुल 57 में से 45 में फेसबुक के जरिए भड़काऊ या भ्रामक पोस्ट किए गए थे, बाकी 9 वाट्सएप पर। खास बात यह भी निकली कि 104 में 58 मामले सिर्फ 4 पुलिस रेंज- शाहाबाद, मुजफ्फरपुर, सारण और मगध के 16 जिलों में दर्ज हुए हैं। अबतक 79 लोग इन मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। एडीजी मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस खुद ही संज्ञान लेकर शिकायतकर्ता के रूप में एफआईआर करा रही है।

आरोपी 90% युवा, सूची में शिक्षक और एएसआई भी
आरोपियों में 90 प्रतिशत से अधिक युवा हैं। इनके अलावा शिक्षक, पुलिस अफसर से लेकर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि तक शामिल हैं। बक्सर के एक एएसआई ने वाट्सएप ग्रुप में छापेमारी की गलत वीडियो के साथ भड़काऊ पोस्ट किया था, जिसकी जांच के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। छपरा में जेपी यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ के सचिव को बदनाम करने के लिए फर्जी पोस्ट किए गए।

दुस्साहस ऐसा कि पुलिस-प्रशासन से भी डर नहीं
फेसबुक के जरिए डीएम और एसपी को भी धमकाया जा चुका है। फेसबुक लाइव पर पूर्णिया के एसपी के खिलाफ अभद्र भाषा बोल रहे धमदाहा के युवक सोनू कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फेसबुक पर ही दरभंगा के डीएम को गोली मारने पर 2 लाख के इनाम का ऐलान किया गया था। इस मामले में दो संदिग्ध युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया, मगर असली दोषी की पहचान नहीं हो सकी है।

नियम-कानून- आईटी एक्ट में 3 साल की जेल और जुर्माना
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना, फेक न्यूज या भड़काऊ मैसेज-वीडियो पोस्ट करना या वायरल भ्रामक-भड़काऊ पोस्ट को शेयर करना दंडनीय अपराध है। पटना हाइकोर्ट के सीनियर वकील योगेशचंद्र वर्मा के मुताबिक आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत 3 वर्षों की जेल व 5 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है। आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 295ए, 500 व 505 के तहत भी 3 वर्षों की सजा के साथ जुर्माना हो सकता है।

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