क्या चल रहा है?

इंडस्ट्री चलाने को चार दिन में 700 आवेदन, मंजूरी मिली सिर्फ नौ को, उद्यमी बोले-वेरिफिकेशन धीमा, ऐसे तो मंजूरी में लग जाएगा एक साल

  • उद्योग खोलने के लिए अनुमति देने में देरी, उद्यमियों में नाराजगी, बोले प्रशासन को अपने काम करने के तरीके में बदलाव करने की जरूरत है
  • 21 अप्रैल से राज्य सरकार ने शर्तों के अनुसार इंडस्ट्री खोलने की दी है सहमति, अभी सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही दी जा रही मंजूरी

फरीदाबाद. भास्कर न्यूज |फरीदाबाद
नगर निगम सीमा क्षेत्र के बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में इंडस्ट्री चलाने के लिए चार दिन में 700 उद्यमियों ने आवेदन कर अनुमति मांगी है लेकिन अभी केवल नौ को ही मंजूरी मिली है। उद्यमियों का कहना है यदि इसी रफ्तार से प्रशासन फिजिकल वेरिफिकेशन करता रहा तो उद्योग खुलने में साल लग जाएंगे। प्रशासन की शर्तों से भी उद्यमी परेशान हैं। उनका कहना है कि जो शर्तें मानने का दबाव बनाया जा रहा है उन्हें पूरा करना सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए संभव नहीं है।
निजी साधन से लाने ले जाने संभव नहीं होगा
उद्यमी सेनेटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करा लेगा लेकिन कर्मचारियों को फैक्टरी में रखना या फिर अपने निजी साधन से उनके लाने ले जाने की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा। आज उद्यमी लॉकडाउन में वैसे ही आर्थिक नुकसान से जूझ रहा है। फिर वर्करों के खाने, ठहराने अथवा लाने ले जाने की व्यवस्था को कैसे कर पाएगा। सरूरपुर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पत्र लिख इंडस्ट्री खोलने के लिए लगाई गई शर्तों को वापस लेने की मांग की है।

सरकार का यह है आदेश| केंद्र सरकार के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने नगर निगम सीमा क्षेत्र के बाहर इंडस्ट्री को चलाने की अनुमति देने की घोषणा की है। लेकिन इसके लिए कई प्रकार की शर्तें लगाई गई हैं। फरीदाबाद में करीब 1500 से 1800 ऐसी इंडस्ट्री हैं जो निगम सीमा क्षेत्र के बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। जिला उद्योग केंद्र के पूर्व जीएम अनिल चौधरी के मुताबिक फरीदाबाद में डींग, सरूरपुर का आधा हिस्सा, साहुपुरा, सीकरी, सोफ्ता, खंदावली, मुजेड़ी, डबुआ पाली रोड, बाजरी, भांखरी, तिगांव, पृथला, जसाना, कांवरा, मोहना, धौज, कैलगांव आदि इलाके आते हैं।

सरकार ने ये लगाई हैं शर्तें

उद्यमियों के मुताबिक सरकार ने जो शर्तें लगाई हैं उनमें सभी उद्योग प्रबंधन को अपने यहां नियमित सेनिटाइज की व्यवस्था करनी होगी। सोशल डिस्टेंसिंग और कर्मचािरयांे को मास्क लगाना अनिवार्य होगा।  इसके अलावा वर्करों को कंपनी में ही ठहराने और उनके खाने की व्यवस्था करना होगा। या फिर कंपनी प्रबंधन निजी साधन ने एक निर्धारित स्थान से कर्मचारियों को लाने ले जाने की व्यवस्था करे। जिन कर्मचारियों को बुलाना है उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर, कहां से कहां तक आना-जाना है। यह सारी जानकारी देनी होगी।

वेरिफिकेशन के बाद दी जा रही मंजूरी

जिला उद्योग केंद्र के सहायक निदेशक ईश्वर सिंह यादव ने बताया कि कर्मचारियों की संख्या के अनुसार तीन प्रकार की कमेटी सरकार ने बनाई है। जिन लघु व सूक्ष्म उद्योगों में 25 वर्कर तक काम करते हैं उन्हें चलाने की मंजूरी संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, डीएसपी, बीडीपीओ और सहायक श्रमायुक्त की कमेटी देगी। जिन उद्योगों में 25 से 200 वर्कर काम करते हैं वहां के लिए एडीसी, संबंधित डीएसपी, बीडीपीओ और सहायक श्रमायुक्त और जहां 200 या उससे अधिक वर्कर काम करते हैं उसकी मंजूरी डीसी, पुलिस कमिश्नर, जीएम डीआईसी और डिप्टी लेबर कमिश्नर की कमेटी मंजूरी देगी। मंजूरी देने से पहले कमेटी संबंधित कंपनी में जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेगी। यदि कमेटी संतुष्ट होती है तभी अनुमति मिलेगी।

700 में सिर्फ नौ को मिली अनुमति

सहायक निदेशक ने बताया कि गुरुवार शाम तक फरीदाबाद के करीब 700 उद्यमियों ने सरल हरियाणा पोर्टल पर इंडस्ट्री चलाने के लिए आवेदन किया है। यह पोर्टल 20 अप्रैल से ओपन हुआ था। चार दिन में सिर्फ नौ इंडस्ट्री का वेरिफिकेशन कर कमेटी चलाने की अनुमति मिली है। अभी टीमें आवेदनकर्ताओं की इंडस्ट्री का वेरिफिकेशन कर रही हैं। कमेटी जैसे-जैसे इंडस्ट्री के सत्यापन कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी उसी आधार पर अनुमति दी जाएगी

उद्यमी बोले इस रफ्तार से लग जाएंगे साल

प्रशासन की वेरिफिकेशन और लगाई गई शर्तों से उद्यमी संतुष्ट नहीं हैं। सरूरपुर इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र शाह एवं कृष्णा नगर इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान देवेंद्र गोयल ने कहा कि प्रशासन के पास इतनी टीम नहीं है कि वह आवेदन करने वालों का जल्द से जल्द वेरिफिकेशन कर चलाने की मंजूरी दे सके। प्रशासन की इस धीमी रफ्तार से इंडस्ट्री ओपन होने में सालभर लग जाएंगे। यह भी कहना है कि प्रशासन और पुलिस की भारी भरकम टीम इंडस्ट्री में पहुंचकर सत्यापन कर रही है उससे उद्यमियों में भय पैदा हो रहा है।

सेल्फ डिक्लेरेशन पर ही दी जाए मंजूरी 

फरीदाबाद मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव रमणीक प्रभाकर, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रविभूषण खत्री, उद्यमी एसएस कपूर अखिल जैन, राहुल गुप्ता आदि का कहना है कि सेल्फ डिक्लेशन का नियम होना चाहिए। फिजिकल वेरिफिकेशन के बहाने काम अटकाए रखना सही नहीं। ओपन इंडस्ट्री का कमेटी रेंडम चेकिंग करे। चेकिंग में शर्तों का पालन न हो रहा हो तो उसे बंद कराए।

पांच वर्करों के लिए वेरिफिकेशन में छूट

उद्यमी देवेंद्र गोयल, अखिल जैन व राहुल गुप्ता का कहना है कि जिन उद्योगों में महज 5-7 वर्कर काम कर रहे हैं वहां वेरिफिकेशन सही नहीं। अखिल जैन व राहुल गुप्ता का कहना है कि उनकी सरूरपुर में छोटी इंडस्ट्री है। वह आटा, दाल, चीनी और हैंड सेनेटाइजर का पाउच बनाते हैं। यह आवश्यक सेवाओं में कवर होती है। 15 अप्रैल से आवेदन किया, लेकिन अनुमति नहीं मिली।

नाॅन कंसर्निंग एरिया में भी अनुमति मिले 

सरूरपुर इंडस्ट्री  एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र शाह ने मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री को पत्र लिख कहा कि सरकार को नान कंसर्निंग क्षेत्रों में भी इंडस्ट्री चलाने की अनुमति देनी चाहिए। वर्करों को ठहराने अथवा निजी साधन से लाने की शर्त बेहद मुश्किल है। क्यांेकि छोटे उद्योग इसे वहन नहीं कर पाएंगे। जिन्हें अभी 15-20 कर्मचारियों से काम चलाना है वह कैसे व्यवस्था करेगा।

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