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‘अर्थव्यवस्था 4 साल पीछे, लोग खाने को तरस रहे हैं’, कोरोना ने सबसे ज्यादा ब्रिटेन को रुलाया है

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हुई है और इस महामारी से अभी तक 3 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। और 2 लाख 12 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जान तो जा ही रही है साथ में इस संक्रमित कर देने वाली महामारी के वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ठप पड़ी हुई है। इस तबाही में यूरोप पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। वहीं इस महाद्वीप के सबसे ताकतवर देश ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था इस तरह से तबाह हो चुकी है कि आने वाले 2019 तक के आंकड़ों पर फिर से पहुंचने में 3 वर्ष लग सकता है। यानि कोरोना ने ब्रिटेन को 4 वर्ष पीछे धकेल दिया है, जहां से उबरने में ब्रिटेन को और भी कई चुनौतियों से गुजरना पड़ेगा।

ब्रिटेन की फॉरकास्टिंग ग्रुप EY Item Club ने यह अनुमान लगाया है कि ब्रिटेन की इकॉनमी वर्ष 2023 से पहले अपने पुराने 2019 के स्तर पर नहीं लौट सकती है। इस ग्रुप का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से रुके हुए आर्थिक गतिविधियों के उबरने में उम्मीद से अधिक समय लग सकता है और मौजूदा हालात में पहुंचने के लिए उसे 2023 तक इंतज़ार करना पड़ सकता है। इस ग्रुप ने चेतावनी भी दी कि ब्रिटेन इस साल एक ‘गहरी, लेकिन छोटी मंदी’ का सामना करेगा, जिसके कारण जीडीपी में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आएगी और फिर ये उसके अगले वर्ष ही आंशिक रूप बढ़ सकेगा।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, एक पूर्व बैंक ऑफ इंग्लैंड रेट-सेटर ने भी इसी तरह की चेतावनी दी थी कि कोरोनोवायरस से यूके के इकॉनमी की रिकवरी पहले की तुलना में धीमी होने की संभावना है और अगले दो दशकों तक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ब्रिटेन के लोगों को भुगतान करना पड़ेगा।

ब्रिटेन में लॉकडाउन को हटाने की मांग बढ़ने लगी है और कई लोग PM बोरिश जॉनसन से लॉकडाउन हटाने की मांग कर रहे हैं जिससे आर्थिक गतिविधियों को फिर से पटरी पर लाया जा सके। परंतु पीएम बोरिस का मानना है कि अगर लॉक डाउन हटाया जाता है तो कई कई हज़ार मौतों को देखना पड़ सकता है।

लेकिन अगर लॉकडाउन रहता है तो ब्रिटेन में 2020-21 के बजट घाटा में £ 273 बिलियन तक बढ़ सकता है जो कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक वर्ष में सबसे बड़ा घाटा होगा। वहीं द आइटम क्लब ने यह भी कहा कि दूसरी तिमाही तक GDP लगभग 13% घट जाएगी। यह 2008 में आए सबसे अधिक कमी से 6 गुना तेज़ रफ्तार से घटेगा। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था किस हालत में है। जो बेरोजगारी संकट कोरोना से पहले 4 प्रतिशत थी वो बढ़ कर 6.8% होने की उम्मीद है। बता दें कि कोरोना की वजह से ब्रिटेन में हर 3 में से एक नौकरी खतरे में है।

यूके की अर्थव्यवस्था ने कोरोनो वायरस को काफी देर से पहचाना जिसका यह नतीजा हुआ है कि आज ब्रिटेन 4 वर्ष पीछे जा चुका है। जब दिसंबर और जनवरी में चीन में यह वायरस फैल गया,तब ब्रिटेन के अधिकांश व्यवसाय ब्रेग्जिट में व्यस्त थे। कुछ ही सप्ताह में इस वायरस ने पूरी दुनिया के सप्लाई चेन को तहस नहस कर दिया। मार्च तक आते आते पूरे विश्व में लॉक डाउन जैसा माहौल हो चुका था जिसके लिए ब्रिटेन कभी तैयार ही नहीं था।

आज अर्थव्यवस्था इस प्रकार से रुकी हुई है कि इस सुपर पावर कहे जाने वाले देश, ‘यूके’ के नागरिकों के पास भी खाने की भारी किल्लत होती जा रही है। UK की फूड फ़ाउंडेशन के मुताबिक लॉकडाउन के महज़ तीन हफ्तों के अंदर ही UK के करीब 15 लाख ऐसे लोग पाये गए हैं जो एक वक्त का खाना जुटाने में भी अक्षम हैं। इसके अलावा UK में 30 लाख ऐसे घर हो सकते हैं, जहां घर में कम से कम एक व्यक्ति को अपना खाना छोड़ना पड़ रहा है।

एक समय में पूरब से पश्चिम तक राज करने वाले ब्रिटेन की आज एक ही झटके में यह हालत हो चुकी है कि अब अगले 4 वर्ष तक उबर नहीं पाएगा। इसे विडम्बना ही कहेंगे कि कभी सूर्यास्त न देखने वाले इस देश में आज खाने के लाले पड़ रहे हैं।

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