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अमिताभ बच्चन ने शुरू किया खाने के पैकेट्स का वितरण, बताया मुश्किल टास्क

बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने गुरूवार को बताया कि उन्होंने 2000 खाने के पैकेट्स का वितरण शुरू कर दिया है. अमिताभ मुंबई की कई जगहों पर लंच और डिनर बांटेंगे. कोरोना वायरस के चलते अमिताभ बच्चन ने गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने का फैसला किया है.

77 साल के अमिताभ बच्चन इन पैकेट्स के अलावा महीनेभर की जरूरत के सामान के 3000 बैग्स भी लोगों तक पहुंचाने वाले हैं. अपने ब्लॉग में बच्चन ने लिखा, ‘निजी रूप से 2000 खाने के पैकेट्स लंच और डिनर के लिए शहर की अलग-अलग लोकेशनों पर हर रोज बांटे जा रहे हैं. इसके साथ ही लगभग 3000 बड़े बैग्स को पहुंचाने का सिलसिला भी चल निकला है. इससे लगभग 12000 लोगों का पेट भरेगा.’

इन जगहों पर बांट रहे खाना

अमिताभ ने बताया कि लोकेशन जैसे हाजी अली दरगाह, माहिम दरगाह, बाबुलनाथ मंदिर, बांद्रा के स्लम और उत्तरी मुंबई के कुछ और स्लमों में रहने वाले लोगों की मदद वे कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इन सभी तक सामान को पहुंचाना बहुत ही मेहनत का काम था, लेकिन उन्हें आशा है कि सबकुछ जल्द ठीक हो जाएगा.

उन्होंने लिखा, ‘इस प्रक्रिया की अपनी दिक्कतें हैं. लॉकडाउन की वजह से घरों से निकलना गैर-कानूनी माना जा रहा है. तो भले ही मैंने खाने के बैग्स तैयार कर लिए हों, लेकिन उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में दिक्कत हो रही है.’

अमिताभ ने आगे बताया, ‘अधिकारियों का कहना है कि पैकेट्स जब लोगों तक पहुंचते हैं, तो स्लम में रहने वाले लोग गाड़ी की ओर दौड़ते हैं. इससे भगदड़ मचने का खतरा है जो कि पुलिस सोशल डिस्टेंसिंग के माहौल में नहीं होने दे सकती.’

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अमिताभ ने बताया कि उन्होंने खुद इस बात पर जोर दिया है कि जहां भी खाने का वितरण हो रहा है, वहां लोग सही से लाइन बनाएं. इससे सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो किया जा सकेगा. उन्होंने लिखा, ‘भगवान का शुक्र है कि वालंटियर्स मुश्किल समय में भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं. वो ध्यान रख रहे हैं कि सबकुछ ठीक से हो. ये बहुत मुश्किल टास्क है, लेकिन क्या कर सकते हैं. लाइनें दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही हैं.

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बता दें कि अमिताभ बच्चन ने हर महीने एक लाख दिहाड़ी मजदूरों को सुपोर्ट करने की कसम खाई है. ये दिहाड़ी मजदूर All India Film Employees Confederation से हैं. कोरोना वायरस की मार इन सभी पर पड़ी है.

अमिताभ ने बताया कि प्रक्रिया के शुरू होने के बाद वे अपनी नजर उसपर बनाए हुए हैं उन्होंने बताया, ‘उम्मीद है कि कुछ दिनों में मुझे बांटे हुए सामन का डाटा मिल जाएगा. अगर हर परिवार में चार लोग हैं ऐसा माना जाए तो इस सामान से 4 लाख लोगों का पेट भरा जा रहा है.’

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